क्या आप बीमार हैं? वज़ह?

 

मन द्वारा संचालित दिल की धड़कन।

ओम शांति.... 

 "हमारी भावनाएं हमारे शरीर की हर कोशिका पर असर डालती हैं.... मन और शरीर... मानसिक और शारीरिक पहलू आपस में गुथे हुए हैं |"

             थॉमस टटको

In This Article


  •  अच्छे स्वास्थ्य का क्या अर्थ है?
  •  बीमार होने के क्या कारण है?
  •  बीमार होने का मुख्य कारण जिस पर हमारा ध्यान नहीं जाता!
  •  कुछ मुख्य मन के भाव, जिनसे हमारी तन की सेहत प्रभावित होती है!
  •  कुछ मुख्य मन के भाव जिन पर ध्यान देकर हम अपने तन की सेहत को ठीक रख सकते हैं।
  •  निष्कर्ष

"हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……
स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।
स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।

    अच्छा स्वास्थ्य क्या है ?  स्वस्थ होने का क्या मतलब है? हम सबको लगता है कि स्वस्थ होने का मतलब है.... बीमार ना होना....लेकिन स्वस्थ होने का अर्थ इससे कहीं ज्यादा है.... अगर आप ठीक-ठाक महसूस कर रहे हैं या बीमार नहीं महसूस कर रहे हैं तो इसे सच्चा स्वास्थ्य नहीं कहेंगे |

    सचमुच स्वस्थ होने का मतलब है.... छोटे बच्चों जैसा महसूस करना,  उनके सामान ऊर्जावान महसूस करना,  चिंता और तनाव से मुक्त होना,  हर समय जोशीले और रोमांचित महसूस करना |

   हमारे बीमार होने के कई  कारण  है:-- गलत खानपान, अनियमित दिनचर्या,  गलत रहन सहन,  व्यायाम का अभाव आदि...  इन सब कारणों के द्वारा हमारे शरीर में बीमारी आती है.. यह तो सबको पता है.. और हर व्यक्ति अपनी बीमारी की वजह को ढूंढ लेता है कि किस कारण मेरा शरीर रोगयुक्त हुआ | यह दिखने वाली वजह है जिनके कारण शरीर बीमार पड़ा.......। परंतु कई बार शरीर इन बाहरी वजह से बीमार नहीं पड़ता.. व्यक्ति के मन की स्थिति उसके शरीर को बीमार कर देती है...। 

    कई लोगों में अच्छी सेहत के बजाय डर की धारणाएं ज्यादा होती है, इसमें हैरानी की कोई बात नहीं... क्योंकि दुनिया में बीमारियों पर बहुत अधिक गौर किया जाता है, और हम सब इन से हर दिन घिरे रहते हैं । चिकित्सा के क्षेत्र में इतनी तरक्की होने के बावजूद बीमारियां बढ़ रही हैं... क्योंकि बीमारियों को लेकर लोगों का डर भी बढ़ता जा रहा है.। 

 बीमारी की वजह 

   बीमारी हमारे पास क्यों आती है ? बीमारी की वज़ह....हमारी जिंदगी में रहने वाले कुछ भाव....  पश्चाताप,  डर, आलोचना, क्रोध...... यह चीजें हमें नष्ट करती हैं हमें भावनात्मक रूप से कमजोर करती हैं और बीमारी लाती हैं। पश्चाताप के कारण हम अपने को अपनी गलतियों के लिए माफ नहीं कर पाते। हम अक्सर अपने पास्ट को लेकर चलते हैं,  पुरानी बातों को लेकर के हमारे विचार चलते रहते हैं.... जो हमें निरंतर दुखी करते हैं, और हम उन दुखों का बोझा अपने ऊपर लादे हुए चलते हैं |नकारात्मक रहना है या सकारात्मक रहना है,  पश्चाताप में रहना है,  डर में रहना है,  विश्वास में रहना है, या विश्वास नहीं करना है क्षमा करना है,  या क्षमा नहीं करना है,  यह हमारा स्वयं का चुनाव होता है.... हमें ही इस पर विचार करना है... क्योंकि यूनिवर्स तो हमें हमारे संकल्पों का सपोर्ट देती है... वह संकल्प जैसे भी हो सकारात्मक हो या नकारात्मक हो |

     हमारी भावनाओं का आधार दूसरों पर है... व्यक्तियों पर है... परिस्थितियों  पर है... हमने अपनी फीलिंग का स्विच दूसरों के हाथ में दे दिया है... कोई हमारी आलोचना करता है तो यह उनका संस्कार है | आलोचना करना एक कमजोरी और बीमारी है किसी ने मुझे ऐसा बोल दिया इसलिए हम डिस्टर्ब हुए... जिन्होंने हमारे लिए गलत किया... यह उनकी मन स्थिति है.. उनका डिस्टरबेंस है,  हमारा नहीं... यह ऊर्जा उनकी है,  हमारी नहीं... लेकिन अगर हमने उस एनर्जी को ग्रहण किया तो हम बीमार हो जाएंगे.... फिर हम कहते हैं कि आप के कारण हम बीमार हुए, हम अपने को भावनात्मक रूप से कमजोर करते हैं,  जो भी हम बाहर से ग्रहण कर रहे हैं, उसका इंफेक्शन हमें लग रहा है,  अब हमें ऐसे वायरस से बचना है,  और बचाना है |

        क्रोध करना भी बीमारी की एक बड़ी वजह है | अक्सर गुस्सा करके हम दूसरे का नुकसान तो नहीं कर पाते पर... अपना सबसे अधिक नुकसान कर बैठते हैं,  उदाहरण के लिए हम गाड़ी चला रहे हैं, और सामने से एक गाड़ी आ रही है परंतु उसका ड्राइवर गाड़ी अच्छे से नहीं चला रहा है.... यह देख कर के हम इरिटेट होते हैं,  और उस पर गुस्सा करते हैं,  अपशब्द बोलते हैं परंतु गाड़ी के अंदर से कोई नहीं सुन रहा लेकिन इस तरह रोज करते करते यह हमारा संस्कार या आदत बन जाता है | 

अशांत मन, थका हुआ तन

         अगर हम किसी को ठीक कर सकते तो बहुत बढ़िया, नहीं तो कम से कम हमें अपनी शक्ति को बचा कर रखना है जैसे कि एक अच्छी सोच,  शुभ भावना,  एक पावरफुल थॉट दें  कि आप भी सही तरह से गाड़ी चलाना सीख जाएं और फिर अपना काम करें अपनी एनर्जी वेस्ट ना करें |

   इस तरह हमें अपने ऊपर ध्यान रखना है कि बातें आएंगी, मेरे अनुसार नहीं होंगी, लेकिन एक थॉट्स से ज्यादा उस पर मुझे नहीं सोचना,  मुझे अपनी आत्मा की शक्ति को बचा कर रखना है, अपने जीवन में संतुष्टता और खुशी लानी है |

      पूरे विश्व के अंदर भारत को डिप्रेशन में नंबर वन कहा गया है, यह तीव्र गति से बढ़ती हुई बीमारी है, डब्ल्यूएचओ(WHO) के अनुसार भारत में हर चार व्यक्ति में से एक व्यक्ति इस बीमारी का शिकार है.. मतलब हर घर में एक व्यक्ति है....हमें कुछ ऐसा करना है कि नंबर वन होने के बजाय अपने देश से इस डिप्रेशन को खत्म करना है, मेंटल हेल्थ को बचाना है, शरीर के स्वास्थ्य को बचाना है, टूटते रिश्तो को जोड़ना है, प्रकृति को सात्विक बनाना है, यदि हर व्यक्ति इस तरह सोचने लगे तो समाज में परिवर्तन संभव ही है.. क्योंकि स्व परिवर्तन ही विश्व परिवर्तन है |

अपना ख्याल रखें।

 क्षमा भाव से जुड़ी है हमारी सेहत

     जब हम किसी को क्षमा करते हैं, तो हम अहंकार के दृष्टिकोण नहीं रखते, बल्कि ब्रह्मांड की उस प्रक्रिया को प्रकट करने की अनुमति देते हैं, जो हमारे जीवन में शांति और खुशी लाएगी।

     जब हम किसी से नाराज होते हैं, किसी के प्रति शत्रुता की भावना रखते हैं, तो यह भावनाएं एड्रीनलीन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन जारी करती हैं, जिसका प्रभाव हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली और ह्रदय की कार्यशैली पर पड़ता है....दूसरी ओर जब हम क्षमा करते हैं, तो निर्णय और दोष का बोझ छोड़ देते हैं, मन शांत हो जाता है,और तनाव मुक्त हो जाते हैं।

निष्कर्ष


'मेडिटेशन से हीलिंग' विषय पर राजयोगिनी ब्रम्हाकुमारी गोपी बहिन,जो लंदन से हैं, उन्होंने बताया कि बीमारी की ऊपज़ हमारे कमजोर मन से होती है, और फिर बीमारी हमारे शरीर में फैलती है, उन्होंने साइंटिफिक प्रमाण देते हुए बताया कि कैसे मेडिटेशन एक मेडिसिन भी है।
राजयोग मेडिटेशन हमें हर परिस्थिति में शांत और खुश रहने की शक्ति देता है। और हर परिस्थिति में खुश रहने का स्वभाव आज की दुनिया में बनाना ही होगा, क्योंकि दिनोंदिन विपरीत परिस्थितियां बढ़ चुकी है...पर आप अपने को समर्थ बनायें।
आप बारिश नहीं रोक सकते, पर छाता और रेनकोट का इस्तेमाल कर सकते हैं। सारे रास्तों पर कालीन नहीं बिछा सकते... पर जूते और चप्पल पहनकर कंकड़ और कांटों से स्वयं को बचा सकते हैं । परिस्थितियां सदा एक जैसी नहीं रहती, जिस तरह आई, उसी तरह एक दिन चली जाएंगी। इस सत्य को जानने से सदा खुश और तनावमुक्त रह सकते हैं।
 कुछ ध्यान देने योग्य बातें.....

  • हमें स्वयं को बदलना है....
  • स्वयं को, जैसे हैं वैसे स्वीकारें...
  • अपने मस्तिष्क को शक्तिशाली विचार दें,
  • अत्यधिक चलने वाले विचारों पर निगाह रखें..
  • व्यर्थ विचारों को हटाए, 
  • अपने अतीत को जाने दे...
  • स्वयं से प्यार करें...
  • स्वयं पर और ईश्वर में विश्वास करें.....

        हम मनुष्यों को शक्तिशाली बनाने के लिए  ब्रह्माकुमारी संस्था में  बहुत सुंदर बात कही है:--- निंदा, स्तुति, मान, अपमान में हम एकरस स्थिति में रहे, अचल रहे।
   उसके लिए सुबह सुबह उठ करके अपने मन को पॉजिटिव थॉट्स देने हैं कि......

  • मैं संसार में अलग हूँ,
  • मैं सर्वशक्तिमान की श्रेष्ठ रचना हूँ,
  • मैं मास्टर सर्वशक्तिमान हूँ,
  • मैं शक्तिशाली हूँ..।

  इस तरह के शक्तिशाली विचार मन में लाने से हमारे अंदर की भावनात्मक कमजोरियां धीरे-धीरे खत्म होती जाएंगी और हम मजबूत बनते जाएंगे  क्या आप बीमार हैं? वज़ह? यह लेख आपको कैसा लगा? यदि आप समझते हैं कि हमारी मन की स्थिति भी हमारी शारीरिक स्थिति को बनाती और बिगड़ती है! तो अपने विचार कमेंट बॉक्स में शेयर करें, आपके सुझावों का हमें  इंतजार रहेगा। तो अपना ध्यान रखें, शारीरिक और मानसिक स्तर पर भी |धन्यवाद 😊🙏✍️

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2 टिप्पणियाँ

  1. सच, हमे बच्चों कि तरह होना चाहिए।सही कहा आपने, पूर्णतया स्वस्थ होना बच्चों कि तरह ऊर्जावान चुस्त होना है । क्रोध हर बीमारी की जड़ है। स्वस्थ रहने का अच्छा मार्ग सुझाया है आपने । धन्यवाद

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