शरीर डिटॉक्स करने के घरेलू उपाय





 शरीर डिटॉक्स करने के घरेलू उपाय


ओम शांति.... हमारा शरीर एक चलती फिरती मशीन है, जिस तरह एक मशीन में गंदगी जमा हो जाती है, उसके कलपुरज़ों में जंग लग जाता है, बदरंग होने लगते हैं और अंत में, वे अपना काम करना बंद कर देते हैं, इसी तरह से हमारा शरीर भी इस बाहरी वातावरण से टॉक्सिन (गंदगी) ग्रहण करता रहता है…. नतीजा समस्याएं और बीमारियां। आज हम बात करेंगे , कैसे हम रोजमर्रा में कुछ घरेलू चीज़ों का इस्तेमाल करके अपने शरीर को स्वस्थ और स्वच्छ ( आंतरिक ) रख सकते हैं!

In This Article
  • शरीर में टॉक्सिन कहां से आते हैं
  • सबसे बड़ा औषधि केंद्र - हमारा रसोईघर
  • हरी पत्तियों, फल,सब्जियों और मसालों द्वारा शरीर को डिटॉक्स और स्वस्थ रखना

"हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……

स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।
स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।



शरीर में टॉक्सिन कहां से आते हैं

    

 टॉक्सिन अथार्त गंदगी..….. हमारे ना चाहते हुए भी हमारे शरीर में अनजाने पहुंच जाती है...। भोजन में साफ सफाई का ध्यान ना रखना, प्रदूषित हवा, प्रदूषित पानी, खाद्य पदार्थों में रसायन का प्रयोग, फल सब्जियों औऱ अनाज में कीटनाशकों का प्रयोग..... यही कारण है कि ये सभी टॉक्सिन हमारे शरीर में जमा होते जाते हैं।


परिणाम स्वरूप, हमारे शरीर में त्वचा रोग, बालों का झड़ना, वजन का अत्यधिक बढ़ना और घटना, शरीर की मांसपेशियों में दर्द, घुटनों का दर्द, सांस संबंधी रोग, किडनी रोग, ह्रदय रोग आदि। ये सभी समस्याएं शरीर में टॉक्सिन बढ़ने के परिणाम स्वरूप होते हैं।

 

बात करें आज से 25 साल पहले की तो…. हमारे आसपास की हवा शुद्ध हुआ करती थी, जमीन की गहराई में उपस्थित पानी साफ और पीने योग्य हुआ करता था। प्रकृति भी सहयोगी हुआ करती थी। चारों तरफ सकारात्मकता और एक नवीन ऊर्जा बिखरी रहती थी….।कारण मनुष्य के हृदय साफ और संगदिल हुआ करते थे…..अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर मनुष्य दूसरों की भलाई के बारे में सोचता और करता था... परंतु आज ऐसा नहीं है, आज मनुष्य केवल अपने लिए सोचता है, अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए, श्रेष्ठ कर्म और धर्म को दूर करके, सभी अनैतिक कार्य करने के लिए तैयार रहता है…...नतीजा हमारे आसपास एक नकारात्मक ऊर्जा का चक्र चलता रहता है।आज हम शुद्ध हवा के लिए एयर प्यूरीफायर लगाते हैं। पीने के पानी के लिए वॉटर प्यूरीफायर लगाते हैं….। इसके बाद भी देखा जाए तो हम बीमारियों से नहीं बच पाते हैं।

      

हमारे भारत देश में स्वास्थ्य लाभ की अनेक पद्धतियाँ हैं,जैसे आयुर्वेदिक, एलोपैथी, होम्योपैथी, नेचुरोपैथी वाइब्रॉनिक। इन सभी पद्धतियों में नेचुरोपैथी और आयुर्वेद को छोड़ कर के और किसी पद्धति में शरीर को डिटॉक्स यानी कि साफ करने की कोई दवाइयाँ नहीं हैं ।😔


सबसे बड़ा औषधि केंद्र है - हमारा रसोईघर….

     

केवल स्वदेशी नीतियों से ही देश फिर से सोने की चिड़िया बन सकता है, ऐसी महान सोच रखने वाले समाजसेवी डॉ राजीव दीक्षित को तो आप जानते ही होंगे! वह एक ऐसे महान व्यक्ति थे, जिसकी जरूरत आज  भारत को सबसे अधिक है! उनकी सभी जानकारियां, जो वह कहते थे,सभी तथ्यो और सबूतों पर आधारित थे।

    

3000 वर्ष पूर्व महर्षि वाग्भट द्वारा रचित अष्टांग हृदयम् के सूत्रों पर आधारित स्वदेशी चिकित्सा के अंतर्गत  उन्होंने यह स्पष्ट किया…. कि केवल 15 %बीमारियां ही गंभीर होती है, जिनके लिए हमें  चिकित्सीय सुविधा चाहिए, अन्यथा 85% बीमारियां तो हम स्वयं ही cure कर सकते हैं, क्योंकि यह हमारा शरीर है और इसके बारे में हम से अच्छा और अधिक, और कोई नहीं जान सकता। हर व्यक्ति अपना स्वयं का डॉक्टर बन सकता है,और उसके इलाज और स्वस्थ रहने का सामान भारतवर्ष की हर रसोई में उपलब्ध है।

 

 तो चलिए देखते हैं कि वह कौन सी चीजें है, जो हमारे आसपास, घर या हमारी रसोई में उपलब्ध है, जिनके द्वारा हम अपने शरीर को डिटॉक्स कर सकते हैं, और बीमारियों से बच सकते हैं, क्योंकि टॉक्सिन ही हमारे शरीर में बीमारी को उत्पन्न करते हैं, और बढ़ाते हैं।


प्रकृति का अमूल्य तोहफा.. हरी भरी पत्तियां


एलोवेरा 

       जी हां…. सबसे पहले मैं आपका ध्यान आपके घर में लगे हुए एलोवेरा के पौधे की तरफ ले जाऊंगी, जिसे कहते हैं ग्वारपाठा।। यह इसका प्राचीन नाम है लोग इसे एलोवेरा के नाम से जानते हैं,एलोवेरा पत्तियों के बीच से निकला हुआ जेल 25 ग्राम लेकर के,12 ग्राम शहद मिलाकर, साथ ही आधा नीबू का रस डाले और सुबह शाम इसे ले। इससे पेट की समस्याओं से छुटकारा मिलता है,और पेट साफ होने लगता है।

कड़वी नीम पत्तियां 

 कड़वी नीम पत्तियों से तो आपका परिचय है ही, जो त्वचा रोग को दूर करती है, इन पत्तियों का लेप या रस मुहाँसे, झाइयों को भी समाप्त करता है। यदि आप इसकी तीन पत्तियों को रोज सुबह चबाकर गुनगुना पानी पी ले, तो इससे आपकी पेट की सारी गंदगी बाहर हो जाती है, और पेट के कीड़े भी मर जाते हैं।

मीठी नीम पत्तियां 

  मीठी नीम पत्ती...इसे हम सब विशेष व्यंजन और साउथ इंडियन व्यंजन में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके बहुत फायदे हैं, हमारे पाचन को सुधारती हैं, वजन को घटाती हैं, एनीमिया के जोखिम को भी कम करती है, बालों की  समस्या में अत्यंत लाभकारी है, इसमें सबसे अधिक विटामिन Aपाया जाता है।

तुलसी की पत्तीयां 

तुलसी की पत्ती... इस पौधे से कोई भी अपरिचित नहीं होगा, भारतवर्ष में इसकी पूजा की जाती है, इसके गुणों की महिमा क्या की जाए. इसके फायदे तो अनमोल हैं। तुलसी में कई प्राकृतिक गुण होते हैं, जिसके इस्तेमाल से कई बीमारियां चुटकीयों में गायब हो

जाती हैं।

हरसिंगार की पत्तियां

हरसिंगार का पत्तियां..जी हां यह भी आपको अर्थराइटिस में आराम देती है, इन को उबालकर पीने से जोड़ों का दर्द और मांसपेशियों का दर्द समाप्त हो जाता है।

पान का पत्ता 

पान का पत्ता भी रक्त की  अशुद्धियों को समाप्त करता है,आपने गौर किया होगा जो लोग पान खाते हैं, उन्हें आर्थराइटिस और जोड़ों की समस्या नहीं होती, पान में इस्तेमाल होने वाले सभी चीजें गुलकंद, चूना, लौंग, इलाइची (कत्था और सुपारी को छोड़कर ) सभी चीजें स्वास्थ्य के लिए अच्छी होती है।

रंग बिरंगे फल

फलों का नियमित सेवन हमारे शरीर को स्वाभाविक रूप से डिटॉक्स करता है। खास तौर पर सुबह के नाश्ते के समय, या फिर 12:00 बजे तक चार रंग के चार मौसमी फलों का सेवन हमें अद्भुत ऊर्जा देता है। पौष्टिकता से भरी हुई यह फलों की डाइट शरीर की विभिन्न कमियों को पूरा करती है, और साथ ही साथ शरीर की सफाई भी होती है।


Fruit diet -natural detoxification


        इस तरह  के अनेक पौधे हैं, गिलोय का पौधा, अजवाइन का पौधा, लेमन ग्रास.....जो हमारे आसपास होते हैं, लेकिन हम उनका प्रयोग नहीं करते, पूरी जानकारी ना होने के कारण।

 हमारी रसोई में भी अनेक तरह के मसाले होते हैं जैसे:--

  1.  दालचीनी के गुण अनेक है, यह रक्तशोधक है, मन की बेचैनी को दूर करती है, यह कफ नाशक है, और स्मरण शक्ति को भी बढ़ाती है।

  2.  शहद के नियमित इस्तेमाल से वजन को नियंत्रित करना सभी जानते हैं, यह अनिद्रा जैसी समस्या को दूर करती है,कफ नाशक है,यह थकान को भी दूर करती है।

  3.  जीरा तो सभी अपने घर में इस्तेमाल करते हैं स्वाद बढ़ाने के लिए। लेकिन क्या आपको पता है.. जीरे को उबालकर उसका पानी पीने से पाचन तंत्र की सफाई होती है,और साथ ही स्त्रियों में यह गर्भाशय की सफाई भी करता है, इसलिए प्रसव के बाद इसका सेवन आवश्यक बताया जाता है।

  4. अदरक. हमारे श्वसन तंत्र के लिए यह आवश्यक घटक है,यह हमारे मेमोरी पावर को बढ़ाता है, और साथ ही साथ संपूर्ण शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी सुधरता है, इस तरह यह वजन को भी संतुलित रखता है।

  5.  हल्दी जिसे हम रसोई का रामबाण कहते हैं।… ये दर्द नाशक, सूजन को दूर करने वाली और एंटीबायोटिक, एंटीसेप्टिक है। यह श्वसन तंत्र के संक्रमण को रोकने में कारागार है।

  6. नीबू विटामिंस, मिनरल्स का भरपूर भंडार है, नींबू रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, नींबू से विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन बी, सोडियम, आयरन, मैग्नीशियम आदि प्राप्त होता है। नींबू को प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट माना गया है।

  7. मेथीदाना भी हमारे रक्त संचार को सही रखता है, इसमें भी एंटी ऑक्सीडेंट का गुण पाया जाता है,यह हमारे हृदय के लिए अत्यधिक लाभकारी है,यह डायबिटीज को भी नियंत्रित करता है।

  8. आंवला में भी एंटी ऑक्सीडेंट का गुण पाया जाता है,नियमित आंवले का सेवन हमारे पूरे शरीर को साफ करता है। इससे पेट की सफाई होती है। बालों में चमक आती है। नेत्र ज्योति को बढ़ाता है। और त्वचा को बेदाग करता है। अनगिनत गुणों का भंडार है आंवला। हरे आंवले का सीजन ना होने पर सूखे हुए आंवले का प्रयोग भी गुणों से भरपूर है।


भारतीय मसालों द्वारा मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली



इन सबके अलावा हमारी रसोई में ऐसे और अनगिनत मसाले हैं, जिनके द्वारा हम शरीर को डिटॉक्स कर सकते हैं जैसे :--

 

सौंफ, अजवाइन, लौंग, इलायची, अनारदाना, काली मिर्च, मुलेठी, कलौंजी, राई, अलसी के बीज, सब्ज़ा के बीज इत्यादि। इनमें कुछ मसालों की तासीर गर्म होती है, और कुछ मसालों की तासीर ठंडी होती है। हमारे भारतवर्ष में भी मौसम बदलते है। मौसम के हिसाब से और अपने शरीर की प्रकृति के हिसाब से, हम इन चीजों का सेवन करके अपने शरीर को अंदर से साफ रख सकते हैं।

जानकारी...Dr piyush saxena  नेचुरोपैथी के द्वारा cleansing therapy कराते हैं.. जो कि अनेक बीमारियों में कारगर सिद्ध होती है।

विस्तार से जानने के लिए उनकी साईट drpiyushsaxena.com पर जाएं ।

     

आयुर्वेद की खोज भारत में हुई थी और भारत में ही इसका व्यापक अध्ययन और अभ्यास किया जाता है। 90% से अधिक भारतीय......आयुर्वेदिक चिकित्सा का किसी न किसी रूप में उपयोग करते हैं। पिछले कुछ वर्षों से और कोरोना काल में पश्चिमी देशों ने भी इसके महत्व को समझा है। यह प्रणाली भारत में 5000 साल पुरानी चिकित्सा प्रणाली है।  5000 साल पहले जब कि हमारा चिकित्सा विज्ञान इतना समृद्ध नहीं था, उस समय में इसी पद्धति के द्वारा मानव शरीर को निरोग रखने, रोग हो जाने पर रोग से मुक्त करने अथवा उसका शमन करने और आयु बढ़ाने से है।


 निष्कर्ष


  "शरीर डिटॉक्स करने के घरेलू उपाय" इस लेख को लिखने का मेरा उद्देश्य ही यही है...सभी स्वस्थ रहें। इसलिये अपनी केयर करें और बीमारी को आने ना दें। और यदि बीमारी आ जाए तो उसे आयुर्वेद, नेचुरोपैथी के द्वारा उस से निजात पाएं। तो दोस्तों, स्वस्थ रहें, मस्त रहें।

 धन्यवाद😊🙏✍️


 आगे आने वाली मेरी पोस्ट का विषय है   "मन को भी डिटॉक्स करें " पढ़ना ना भूले।

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