" हर दिन मैं खुद को सौ बार याद दिलाता हूं कि मेरा अंदरूनी तथा बाहरी जीवन, दूसरे लोगों, जीवित भी और मृत भी के श्रम पर निर्भर है, और यह भी याद दिलाता हूं कि मुझे जितना मिला है.. और अब भी …