परमात्मा ज्योति बिंदु 3

 

संपूर्ण सृष्टि को चलाने वाला परमात्मा एक है!

          ओम शांति..... पिछले लेख में  हमने यह समझा कि निराकार ज्योति बिंदु शिव परमात्मा जो सदा कल्याणकारी हैंं, परम पवित्र है, शांति के सागर हैंं,  जो सर्वोच्च (जन्म मरण के बंधन से दूऱ)हैं। सर्वोपरि (सबसेेे ऊपर) हैं, गुणों में अनंत हैं, और सर्वधर्म मान्य है, सर्वज्ञ (सब कुछ जानने वाला) हैं।

In This Article

  1.  आत्मा और परमात्मा का सामान अस्तित्व
  2.  चिंतन योग्य कुछ बातें
  3.  शिव परमात्मा की पूजा ही भारत के सभी धर्मों में मान्य
  4.  विश्व विख्यात सत्य
  5.  निष्कर्ष

  "हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……

स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।

स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।

आत्मा और परमात्मा का सामान अस्तित्व

 प्रकृति केेे 5 तत्वों से मिलकर इस शरीर का निर्माण होता है, परंतु इस शरीर को चलाने वाली ऊर्जा, जिसे आत्मा कहा जाता है..... वह मनुष्य की भृकुटी के मध्य विराजमान होती हैै.... उसका स्वरूप भी ज्योति बिंदु है.... इससे ही मनुष्य का शरीर चलायमान है..... आत्मा के निकल जाने से व्यक्ति मृत्यु को प्राप्त होता है। सभी विद्वानों,  वैज्ञानिकों,  ऋषि-मुनियों नेे आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार किया हैै ! 

जिस प्रकार आत्मा का स्वरूप दिव्य ज्योति बिंदु है, उसके पिता परम आत्मा शिव का स्वरूप भी दिव्य ज्योति स्वरूप है !!

     सत्य को परखने की कसौटी में मुख्य बात है :- जो सर्व धर्म मान्य है,  उसे परमात्मा के रूप में स्वीकार करें... यही वह मुख्य बात है,  जो भारत को एक सूत्र में बांधती है, भारतवर्ष में अनेक धर्मों को मान्यता मिली हुई है,  जैसे हिंदू,  मुस्लिम,  ईसाई, पारसी,  सिख धर्म आदि। चलिए विस्तार से देखते हैं... क्या सभी धर्मों में ज्योति बिंदु स्वरूप परमपिता परमात्मा शिव को माना जाता है?  चाहे उनके नाम अलग-अलग हों !

 चिंतन योग्य कुछ बातें

    भारत में देखा जाता है कि सबसे प्राचीन मंदिर ज्योतिर्लिंगम... उसमें भी विशेष रूप से 12 ज्योतिर्लिंगम...  आज भी महान तीर्थ स्थान के रूप में माने जाते हैं,  जो कि परमात्मा शिव के ही हैं,  और भारत के हर कोने में स्थापित हैं ! नॉर्थ में अमरनाथ के रूप में शिव की पूजा होती है, साउथ में रामेश्वरम के रूप में उनकी पूजा होती है,  जो श्री राम का भी ईश्वर है,  जिसकी पूजा स्वयं श्री राम ने भी की !! अब सोचने की बात है कि अगर श्रीराम स्वयं भगवान हैं,  तो उनको क्या आवश्यकता हुई,  उस निराकार ज्योतिलिंगम की पूजा करने की?? रावण ने शिव की तपस्या करके शिव शक्तियों को प्राप्त किया था।  शिव शक्ति प्राप्त रावण पर विजय हासिल करने के लिए श्री राम ने भी शिवलिंग की स्थापना करके उसकी पूजा, आराधना की, और शिव से शक्तियां प्राप्त करके रावण पर विजय पाई !

    कुरुक्षेत्र के मैदान में महाभारत युद्ध से पहले श्री कृष्ण ने भी सर्वेश्वर की स्थापना करके उसकी पूजा हासिल की, और पांडवों से भी उस शिवलिंग की पूजा कराई !

    भारत के पूर्व में जाएंगे,  तो सोमनाथ के मंदिर मिलते हैं।  परमात्मा की पूजा सारे भारत भर में होती है इसलिए ज्योतिलिंगम परमात्मा को कहा जाता है,  जो देवों का भी देव है,  जिसकी पूजा सभी देवताओं ने की  ! नवरात्र में देवीओं की हम पूजा करते हैं.... वह नवदुर्गा कौन हैं?  जिसके लिए नवरात्रि के समय आरती में गाते हैं...." शिव शक्ति की आरती जो कोई गावे" 9 देवियां कौन हैं?  यह सब शिव से उत्पन्न शक्तियां हैं ! कहा जाता है.... जब संसार में असुर बढ़ गए तो उनको खत्म करने के लिए शिव ने अपनी शक्तियों को उत्पन्न किया और सारे संसार में भेजकर संपूर्ण रीति से असुर खत्म किए !

    परमात्मा को ज्योतिर्लिंग क्यों कहा गया? क्यों कि उस स्वरूप का एक लिंग रूप बनाकर मनुष्य के सामने रखा गया  ताकि मनुष्य अपनी भावनाएं उसे अर्पित कर सकें,  पूजा कर सकें, प्रार्थना कर सके,  इसलिए भारत के अंदर जितने भी शिव के मंदिर हैं... उन मंदिरों के नाम के पीछे 'नाथ' या 'ईश्वर' शब्द अवश्य जुड़ा हुआ है ! नाथ के रूप में बबूलनाथ,  भोलेनाथ,  सोमनाथ, विश्वनाथ,  अमरनाथ आदि।  ईश्वर के रूप में रामेश्वर,  गोपेश्वर, विश्वेश्वर, पापकटेश्वर, महाकालेश्वर,  ओमकारेश्वर आदि।  सर्व का नाथ और ईश्वर परमात्मा शिव ही है !

 शिव परमात्मा की पूजा ही भारत के सभी धर्मों में मान्य 

   भारत  के अंदर देवताओं की पूजा स्टेट वाइज हो गई है,  लेकिन परमात्मा शिव की पूजा सारे भारत भर में होती है !

      कहा जाता है कि मुस्लिम धर्म में परमात्मा को लेकर जब मतभेद हुआ,  तो उस समय एक आकाशवाणी हुई,  उसमें परमात्मा ने यह कहा कि तुम लड़ाई झगड़ा मत करो, मुझे इस स्वरूप में याद करो और ऊपर से एक पत्थर मक्का में आकर के गिरा... इसलिए वहां उसकी स्थापना हुई !  सारे मुसलमान भाई यह मान्यता रखते हैं कि जीवन में एक बार इस पवित्र  पत्थर का दर्शन अवश्य करना चाहिए ! वह भी निराकार है,  जिसकी कोई आकृति नहीं है... उसको ही 'संग-ए-असवद' कहा .. 'अल्लाह' कहा.... 'नूर-ए-इलाही' कहा... नूर अथार्त  तेजस्वी स्वरूप जिसको हम ज्योतिर्लिंगम कहते हैं,  इसलिए जब मुसलमान नमाज पढ़ते हैं,  तो मक्का की दिशा में बैठकर पढ़ते हैं !

     जापान में जाएंगे, तो 3 फुट की ऊंचाई पर और 3 फुट दूर बैठकर.. एक थाली में लाल पत्थर रखा जाता है वह इस पत्थर को 'करनी का पवित्र पत्थर' कहते हैं... जिसका नाम दिया गया चिंकोनशेकी.. जिसका अर्थ है शांति का दाता... जिसके सामने बैठ कर ध्यान लगाते हैं उसे परमात्मा का स्वरुप मानते हैं !!

     जीज़स ने भी यही कहा... God is light.. I am the son of God.. जीज़स ने यह कभी नहीं कहा...   I am god.... चर्च में भी हमें मोमबत्तियां जलती मिलती हैं, उसमें भी एक बड़ी मोमबत्ती होती है, और बाकी छोटी होती हैं। बड़ी मोमबत्ती परमात्मा का ओर छोटी मोमबत्तियां आत्माओं का प्रतीक हैं !!

     पारसियों की अग्यारी में जायेंगे,  तो वहां पर 'होली फायर' मिलता है,  कहा जाता है कि पारसी लोग जब ईरान से भारत में आए तो जलती हुई जोत का एक टुकड़ा लेकर आए और उसको कहा कि यह अखंड ज्योत है... वह निरंतर जलती रहती है !और वह भी परमात्मा का दिव्य स्वरुप है !

    सिख धर्म में देखें,  तो गुरु नानक देव ने भी यही कहा कि एकोंकार निराकार.... उन्होंने बड़े स्पष्ट शब्दों में परमात्मा के सत्य स्वरूप का वर्णन किया है, वह निराकार है,  निर्वैऱ है,  वही सतनाम है... यह सब महिमा उनकी गुरुवाणी में लिखी हुई है।  इसलिए परमात्मा का यही वास्तविक स्वरूप है,  जिसको हमने ज्योर्तिलिंगम कहा !!


सर्वधर्म माननीय शिव परमात्मा

विश्वविख्यात सत्य 

     एक यूनिवर्सल ट्रुथ यह है कि परमात्मा ही सर्वोच्च भी है, जिसका कोई माता-पिता नहीं, जो सर्वश्रेष्ठ है, इसलिए शिव के साथ एक शब्द जुड़ता है..... उसे भारतवासी शंभू कहते हैं... शंभू का मूल शब्द है... स्वयं भू अथार्त जो स्वयं उत्पन्न हुआ हो,  जिसका कोई माता पिता,  बंधु,  सखा,  गुरु,  शिक्षक,  रक्षक आदि ना हो, जो सभी चक्रों से परे हो,  जो जन्म और मरण से न्यारा हो, जो देश और देश के बंधन से परे हो,  जो पाप पुण्य और सुख दुख से परे हो। इसलिए शिव का न ही जन्म दिखाते हैं,  और ना ही मृत्यु, और ना ही कोई तिथि दिखाते हैं !!  श्री कृष्ण और श्रीराम की जन्म, मृत्यु की तारीख बताई जाती है.. परंतु शिव का जन्म नहीं दिखाते हैं, क्योंकि वह प्रकट हुये, अवतरित हुये और उसी ज्योति स्वरूप में प्रकट हुए... इसलिए उनके अवतरण का यादगार स्वरूप हम सब शिवरात्रि का पर्व मनाते है !!

 निष्कर्ष 

      इस तरह यह पांचो बातें उस एक शिव पिता परमात्मा के साथ लगती है.. इसलिए शिव ही परम सत्य है, परमपिता है, परमेश्वर है।

 परमात्मा ज्योति बिंदु की 3श्रंखलाओं में दिए गए विचार यदि आपको समझने में असुविधा हो रही है, तो आप कमेंट बॉक्स में लिखकर पूछ सकते हैं। परमपिता शिव परमात्मा से जुड़ने के लिए हमें क्या करना है? किस तरह उनका ध्यान लगाकर हम अपने जीवन में सुख शांति ला सकते हैं? यदि इन सब को विस्तार से जानना चाहते हैं तो अपने नजदीकी ब्रह्माकुमारी सेंटर से सहायता लें। अपने नजदीकी ब्रह्माकुमारी सेंटर में जाएं और राजयोग मेडिटेशन की सरल विधि सीखें जो निशुल्क सिखाई जाती है। धन्यवाद 😊🙏✍️

 इसे  विस्तार से समझने के लिए इन्हें भी पढ़ें:-

 परमात्मा ज्योति बिंदु 1

 परमात्मा ज्योति बिंदु 2

 प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू से प्रेरित



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