ॐ शांति... जब हम आध्यात्मिकता की बात करते हैं, तो हर किसी के मन में अलग से विचार उठने लगते हैं, कोई इसे पूजा-पाठ समझता है,कोई इसे बुढ़ापे में करने वाला काम समझता है, कोई इसे भगवा वस्त्र पहन कर जीवन से पलायन करना समझता है, और नतीजा.. आध्यात्मिकता शब्द एक अनसुलझा प्रश्न बनकर रह जाता है।
- आध्यात्मिकता क्या है
- आध्यात्मिकता का सरल अर्थ
- क्या हम आध्यात्मिक हैं चिंतन योग्य बातें
- निष्कर्ष
आध्यात्मिकता का सरल अर्थ
ईशा सद्गुरु का कथन आध्यात्मिकता के अर्थ को सरल भाषा में स्पष्ट करता है..
"एक संसारी मनुष्य केवल अपना भोजन कमाता है, बाकी सब कुछ.. शांति, प्रेम, आनंद, खुशी के लिए उसे दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है.. इसके विपरीत एक आध्यात्मिक व्यक्ति अपनी शांति, प्रेम, खुशी सब कुछ खुद कमाता है, और केवल भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहता है|"
बहुत सारे लोग यह समझते हैं... निरंतर पूजा पाठ करना, मंत्रोचार करना, मूर्ति पूजा के सभी कर्मकांड आध्यात्मिकता की श्रेणी में आते हैं | सभी धार्मिक क्रियाकलाप आध्यात्मिकता की श्रेणी में आते हैं...लेकिन उनका यह अर्थ संकुचित है, आध्यात्मिकता का अर्थ तो बहुत विस्तृत, व्यापक है:----
- आध्यात्मिकता कोई ऐसी चीज नहीं है, जो आप मंदिर, मस्जिद या चर्च में करते हैं, यह केवल आपके अंदर घटित होने वाला एक भाव है |
- आध्यात्मिकता उनके लिए है.. जो जीवन के हर आयाम को पूरी जीवंतता के साथ जीना चाहते हैं...
- स्वयं का रूपांतरण (बदलाव) ही आध्यात्मिकता है....
- अपने जीवन को विवेकपूर्ण तरीके से जीना ही आध्यात्मिकता है....
- आध्यात्मिकता हमारे अस्तित्व से जुड़ी होने के कारण हमें भीड़ से अलग करती है... हमारा व्यक्तित्व प्रभावशाली बनता है।
- आध्यात्मिक व्यक्ति औसत से ऊपर उठकर अपने जीवन को जीता है....
क्या हम आध्यात्मिक हैं?? चिंतन करें....
आध्यात्मिकता एक बड़ा और गंभीर शब्द है लेकिन इसका सरल अर्थ इन छोटी-छोटी बातों से हम समझ सकते हैं, क्या हमारे अंदर यह कुछ बातें हैं? क्या आध्यात्मिकता का कुछ अंश हमारे अंदर भी है ?
- अगर आप किसी भी काम में पूरी तन्मयता से डूब जाते हैं, तो आध्यात्मिक प्रक्रिया वहीं से शुरू हो जाती है, चाहे वह काम झाड़ू लगाना ही क्यों ना हो |
- अगर आप सृष्टि के सभी प्राणियों में उसी परम सत्ता के अंश को देखते हैं, जो आप में है…. तो आप अध्यात्मिक हैं !
- अगर आपको यह समझ आ गया है कि आपके सुख-दुख, क्रोध, क्लेश के लिए कोई और जिम्मेदार नहीं है.. आप स्वयं हो, तो आप आध्यात्मिक मार्ग पर हैं !
- जो भी कार्य करते हैं उसमें स्वार्थ ना होकर, सबकी भलाई है….तो आप आध्यात्मिक हो !
- अगर आप अपने क्रोध, अहंकार, नाराजगी, लालच, ईर्ष्या और पुरानी दुश्मनी आदि दुर्गुणों पर विजय प्राप्त कर चुके हो….. तो आप अध्यात्मिक हो!
- जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी आप अपने अंदर से हमेशा प्रसन्न व आनंद में रहते हो, तो आप आध्यात्मिक हो !
- अगर आप इस सृष्टि की, प्रकृति की या परम सत्ता के प्रति कृतज्ञता महसूस करते हैं, तो आप आध्यात्मिक हो !
- अगर आप में स्वजनों के प्रति ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जाति के लिए प्रेम उमड़ता है, तो आप आध्यात्मिक हो !
- यदि आपके अंदर सृष्टि के सभी प्राणियों के प्रति करुणा फूट रही है, तो आप अध्यात्मिक हो !
- यदि आप सब को उसी रूप में स्वीकारते हो, जैसे वे हैं....तो आप आध्यात्मिक हो!. (acceptance100%)
- यदि आप किसी से कोई उम्मीद नहीं रखते हो, तो आप अध्यात्मिक हो ! (0% expectations)
- यदि आप स्व-दर्शन चक्र (स्वयं को देखना अथार्त अपने व्यवहार, कर्म, संस्कार पर विश्लेषण करना) चलाते हो तो आप निसंदेह आध्यात्मिक हो !
इसमें ज़रा भी संदेह नहीं… बाहरी परिस्थितियों से लड़ने के बजाय अपनी आंतरिक शक्तियों को मजबूत बनाकर ऊपर उठा जाए... क्योंकि ऊपर से देखने में दूर से नीचे की हर चीज छोटी हो जाती है... या दिखाई देती है…. इसी तरह नजरिया बदल करके अपने जीवन की परिस्थितियों से पार पाना आसान हो जाता है |
"आध्यात्मिकता....एक अनसुलझा प्रश्न" यह लेख आपको कैसा लगा? मैंने इस आध्यात्मिकता को समझाने और सुलझाने की एक कोशिश की है, आशा करती हूं सरल भाषा से यह कठिन शब्द भी सरल हो गया होगा। और आपके जीवन में आध्यात्मिकता का प्रवेश धीरे से हो गया होगा। निसंदेह आप भी आध्यात्मिक हो।
धन्यवाद 😊🙏✍️




1 टिप्पणियाँ
वाह, यदि आप किसी से कोई उम्मीद नहीं रखते हो तो आप आध्यात्मिक हो ।
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा लिखा है आपने 👍