क्या समाज के बनाये नियम बंधन हैं?

  

नियंम सावधान रहने के लिए बनाये जाते हैं

  शांति... ' हमारी उड़ान ' में आप सभी का स्वागत है 🙏 जैसा कि शीर्षक से ही स्पष्ट है "क्या समाज के बनाए नियम बंधन है?" व्यवस्था और अनुशासन के चलते समाज में कुछ नियम बनाए जाते हैं..।और नियमों को मानना हम सबके लिए कानूनन जरूरी होता है। लेकिन हमको दैनिक जीवन में नियमों का उल्लंघन करते हुए अनेक लोग दिख ही जाते हैं।

इस लेख में....

  • मनुष्य का स्वभाव आजादी पसंद है
  • समाज के द्वारा बनाए गए नियम
  • नियम की डोर को समझें
  • नियम से संबंधित एक लघु कथा
  • निष्कर्ष

हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……

स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।
स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।

मनुष्य का स्वभाव आजादी पसंद है

पराधीन सपनेहु सुख नाहीं' कहा जाता है कि दूसरों के अधीन रहना सपने में भी सुख नहीं देता ! क्योंकि मनुष्य का स्वभाव आजादी पसंद है..उसे किसी भी तरह का बंधन या परतंत्रता अच्छी नहीं लगती…. ठीक भी है कि यह आजादी हमने बहुत कुर्बानियां देकर के हासिल की है, परंतु आज के समय में आजादी का मतलब बदल गया है... कैसे... आइए देखते हैं :-

हमारे समाज में, परिवार में, देश में कुछ नियम, कायदे, कानून बनाये गए हैं, जिन की वजह से समाज में एक अनुशासन और व्यवस्था का पालन सुचारू रूप से होता है..आज के समय में व्यक्ति अपने ऊपर सामाजिक, नैतिक या अध्यात्मिक किसी भी तरह का बंधन स्वीकार नहीं करता ! आज का युवा वर्ग स्वतंत्र रहना चाहता है... जिंदगी को अपने तरह से जीना चाहता है... वह यह भूल जाता है कि यह नियम हैं.. जो समाज के लिए जरूरी है..वह उन्हें बन्धन मानता है .. जिसे वह तोड़ना जरूरी समझता है।

आज का मुख्य नियम.. एक दूसरे से 6 फीट की दूरी

    समाज के द्वारा बनाए गए नियम   


उदाहरण के लिए... जैसे कि समाज में लोगों को कहा जाता है, बोलने के नियम है.... धीरे बोलो.. कम बोलो.. मीठा बोलो... सोच समझकर बोलो, आदि आदि... पर जब इन नियमों को नहीं माना जाता है... तो हर एक बात झगड़ा बनकर कोर्ट, कचहरी तक पहुंच जाती है, घर परिवारों में कलह क्लेश कर कारण बनती हैं... दूसरा नियम और बंधन.. सड़क पर अपने बाई तरफ चलें या चलना चाहिए..ट्रैफिक नियमों का पालन करें...   पर कोई कहे.. मैं क्यों यह नियम स्वीकार करूं ?? मैं तो स्वतंत्र हूं... मेरी जैसी मर्जी... मैं वैसे ही चलूंगा.. तो क्या वह रोड पर चल पाएगा?? 

यातायात के नियम


नियम की डोर को समझें

  एक चील  आकाश में उड़ रही थी.. और एक पतंग भी आकाश में उड़ रही थी.. पतंग ने देखा कि चील तो बिना किसी बंधन के आकाश में उड़ रही है.. लेकिन मेरे साथ में यह डोर बंधी हुई है.. यह देख कर पतंग ने डोर को अपने से छुड़ाया और देखते ही देखते वह नीचे जमीन पर आ गिरी. डोर से बंधी होने के कारण ही वह आकाश में उड़ रही थी.. डोर से अलग होकर वह उड़ नहीं सकी... इसी तरह इंसान भी समाज के नियम और कायदे की डोर को पकड़कर के सफलता के आसमान में उड़ सकता है !🙂

बिना बंधन के उड़ती चील



  डोर के सहारे उड़ती पतंग

                                                                                     
  भौतिकता और विलासिता के इस समय में व्यक्ति जल्दी से जल्दी सफलता पाना चाहता है..अधिक से अधिक पैसे कमाना चाहता है.. जिस कारण वह कोई भी तरीके चाहे.. सही या गलत... अपना लेता है... लक्ष्य एक ही है उसका... कि कैसे थोड़े वक्त में ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं हासिल करें.. यही वजह है कि वह इन नियम, कायदे को अनदेखा कर देता है |


लघु कथा

 

एक व्यक्ति गाय को रस्सी से बांधकर चल रहा था.. एक सन्यासी खड़ा देख रहा था उसने गांव वालों से पूछा कि यह गाय आदमी से बँधी  है? या आदमी गाय से बँधा है? गांव वालों ने बोला दोनों…. तब सन्यासी ने कहा, अच्छा बताओ यदि यह गाय छूट जाए तो आदमी गाय के पीछे भागेगा कि नहीं?? गांव वालों ने कहा, इस आदमी को ही इसके पीछे भागना पड़ेगा | तब सन्यासी ने कहा.. तो बताओ रस्सी से कौन बंधा हुआ है गाय या आदमी?? गाय तो रस्सी से बँधी  हुई दिख रही थी... परंतु मनुष्य न दिखने वाली रस्सी से बंधा हुआ है !!


        आज का इंसान भी इच्छाओं की रस्सी से बंधा हुआ है, और उन्हीं के पीछे भाग रहा है और जिस कारण वह सभी नियम और मर्यादाओं को छोड़ता जा रहा है .. यह नियम और मर्यादायें समाज का मूल है, अति आवश्यक हैं। इनके अभाव में समाज में पूर्णतः अराजकता का साभ्राज्य होगा |😌

निष्कर्ष

 नियम और मर्यादाओं को भूल कर, सफलता मिलने के बाद भी मनुष्य अपने अंदर की सच्ची सुख शांति को गंवाता है, घुटन और टेंशन महसूस करता है, निराशा और अवसाद को महसूस करता है, और मशीनी जिंदगी को जीता है..

आज के इस कोरोना काल में व्यक्ति नियमों और कानूनों को कुछ समझने लगा है..... यदि वह इनका पालन नहीं करता है.. तो निश्चित ही वह अपने लिए, समाज के लिए, परिवार के लिए और देश के लिए एक समस्या खड़ी कर सकता है !!

  आज जरूरत है संतुलन की, आध्यात्मिकता की, नैतिकता की… एक आध्यात्मिक इंसान ही अपने श्रेष्ठ जीवन द्वारा समाज को बेहतर बना सकता है | "क्या समाज के बनाए नियम बंधन हैं" लेख आपको कैसा लगा? "हमारी उड़ान" वेबसाइट पर आने के लिए आपका धन्यवाद 🙏😊✍️

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