मन को भी डिटॉक्स करें

अब समय है कि मन की सेटिंग को बदला जाय।

 

       ओम शांति.. 1 साल हो चुका है,कोरोनावायरस से लड़ते हुए... वैक्सीनेशन भी शुरू हो गया है, लेकिन हालात अभी भी संभल नहीं रहे है। पिछला साल हम सबके लिए बहुत उथल-पुथल वाला रहा है, शोध बता रहे हैं कि महामारी की वजह से हमारी भावनात्मक सेहत बहुत ज्यादा प्रभावित हुई। मन ने भी टॉक्सिन स्टोर कर लिए हैं इसको संभाला ना गया, तो भविष्य में मानसिक बीमारी एक महामारी का रूप ले लेगी, इसलिए अब जरूरी हो गया है,  कि मन को भी डिटॉक्स किया जाए।

In This Article

  1. मन को डिटॉक्स क्यों करें
  2. मन की स्वच्छता क्यों जरूरी है
  3. कैसे करें मन की सफाई
  4. योग द्वारा शांत मन


"हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……

स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।
स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।

बाहरी सफाई को लेकर तो हम सब  बहुत सचेत हुए हैं... जैसे बार-बार हाथ धोना,  मास्क पहनना, अपने आसपास सफाई रखना, घर पर आने वाली हर वस्तुओं को सेनीटाइज करना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना आदि। लेकिन मन की भी स्वच्छता यानी कि डिटॉक्स जरूरी है।


स्वच्छता और सावधानी


 मन की स्वच्छता क्यों जरूरी है

      

एक सर्वे के अनुसार ( इंडियन साइकाइट्रि सोसायटी ) कोरोनावायरस ने हमारे देश में मानसिक रोगों के शिकार लोगों की संख्या में 15-20% का इजाफा किया है। कोरोनावायरस के कारण लोगों के सामने कुछ समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं जैसे..नौकरी और बिजनेस को लेकर के अनिश्चितता जैसी स्थिति बन रही है, लॉकडाउन से अकेलापन, वायरस से संक्रमित होने का डर, अपने लोगों को खोने का डर, चिंता,अवसाद, तनाव, एंजाइटी आदि की समस्या बढ़ी है….। ऐसे में बहुत से लोगों को संभलना कठिन हो रहा है, विशेषकर युवा और बच्चों के लिए।

क्या,कैसे, क्यूं के जाल में उलझा मन



ऐसे करें मन की सफाई


अपने मानसिक स्तर को सही रखने के लिए सबसे जरूरी है,अपनी मन की भावनाओं पर ध्यान देना, इसके लिए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ कुछ आदतों को अपनाने की सलाह देते हैं :---

  1.  मन के स्तर पर ठीक महसूस करने के लिए हमारी सबसे पहली जरूरत है…. अपनी दिनचर्या को सही रखना, जैसे कि पौष्टिक खाना और 7 से 9 घंटे सोना।

  2.  स्वयं को स्वीकारें, अपनी परिस्थितियों को स्वीकारें, याद रखें जीवन में स्वीकार भाव हमें परिस्थितियों से लड़ने की हिम्मत देता है।

  3.  स्वयं पर भरोसा करना सीखें तथा दूसरों पर भी भरोसा करें।

  4.  नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। ये हमें केवल शारीरिक फिटनेस ही नहीं देगा बल्कि हमारे दिलों - दिमाग के भावनात्मक कचरे को भी दूर करता है।

  5.  अकेले होने पर नकारात्मक विचारों से निकल कर कुछ रचनात्मक कार्यों को करें।

  6.  स्वयं को रिलैक्स करने के लिए संगीत का सहारा ले, प्रकृति  के बीच अपना कुछ समय बताएं,अपनी पसंद के कुछ कार्य करें।

  7.  ऑफिस और घर के कार्यों में एक संतुलन बनाकर चले। एक नियमित अंतराल पर ब्रेक ले, यकीन मानिए यह ब्रेक केवल आपकी थकान ही दूर नहीं करेगा बल्कि आपके मन को ऊर्जावान बना देगा, यह आपकी मन की सफाई के लिए एक प्रमुख उपाय है।

  8.  कोशिश करें कि आप व्यस्त रहें, अपने काम पर फोकस करें, जिससे नकारात्मक बातों का प्रभाव आप पर ना पड़े।

  9.  अपनों के संपर्क में रहें और उनसे बातें करें।

  10.  अपनी भावनाओं और समस्याओं को किसी समझदार और परिपक्व व्यक्ति के साथ बांटें, निश्चय ही यह हमारी मानसिक स्वच्छता के लिए एक शक्तिशाली तरीका है।

  11.  अगर इन सब के बाद भी आपके मन में कोई चिंता या डर सता रहा है,  तो अवश्य ही अपने किसी प्रियजन या एक्सपर्ट से बात करके अपनी समस्या  को शेयर करें।

  12.  अपने विचारों, आशंकाओं और चिंताओं को अपने अंदर रखने से दिमाग पर बोझ बढ़ता है..। इसलिए उसे कागज पर लिखकर मस्तिष्क और दिल को आराम दें। मन की स्वच्छता के लिए यह एक शक्तिशाली तरीका है  

  13.  नई चीजों को सीखें और नई चीजों के साथ अपनी दिनचर्या को सेट करें, इससे मानसिक शक्ति प्राप्त होती है।

  14.  पुरानी अच्छी यादों को ताजा करते रहे, परंतु कष्ट देने वाली यादों को दिल से निकाल दे, मानसिक स्वच्छता और शांति के लिए यह एक कारगर उपाय है।

  15.  मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। पढ़ें.. राजयोग मेडिटेशन

  16.  खुश रहने का प्रयास करें, खुश रहने और मुस्कुराने के मौके तलाश करते रहे । पढ़ें ख़ुशी का ग्राफ

  17.  अपने वर्तमान जीवन के लिए आभार व्यक्त करें...। पिछले असफलताएं, डर और भय को जाने देना सीखे...।ताकि आप अपने वर्तमान में अपनी उर्जा को केंद्रित कर पाए। एक सरल विचार के साथ अपना दिन बताएं कि मैं क्षमा कर सकता हूं।

  18.  खुद को प्यार करें और अपनी केयर भी करें। अपने आपको याद दिलाते रहें कि आप विशेष हो….तो आप निश्चित रूप से अपने हर कार्य में सफलता पाएंगे।

  19.  वर्तमान में आपके जीवन में जो चीजें गलत हो रही है, उन्हें गिनने के बजाय उन चीजों पर ध्यान लगाएं, जो आपको बिना प्रयास प्राप्त हुई है, जो आपको ख़ुशी देती हैं, उनके लिए ब्रह्माण्ड को धन्यवाद दें। कृतज्ञता,आभार और धन्यवाद आदि को विस्तार से समझने के लिए पढ़ें कृतज्ञता बनाम धन्यवाद

  20.  अपने सभी दोषों और कमजोरियों के साथ खुद से प्यार करें।


मन को शक्तिशाली बनाने वाले वाक्यांश

योग से भीतर उतरें ... मन की करे सफाई

"आगे बढ़ो...अवसर को लपक लो... पीछे मुड़कर मत देखो."..आजकल प्रबंधन की दुनिया में ऐसे आदर्श वाक्य सिखाए जाते हैं :-- विकास, प्रगति और सफलता की ओर उठाए गए कदम…. लेकिन जब आप केवल इसी पर टिके हुए मान लेते हैं, कि जिंदगी सिर्फ आगे बढ़ने का नाम है, पीछे हटना कायरता होती है, पीछे देखना बेवकूफी हो सकती है, तो ऐसा सोचते और करते करते एक दिन हम तनाव में घिर जाते हैं...और हमको पता भी नहीं चलता। इस तरह आगे बढ़ने की क्रिया ही हमको उलझन में डाल देती है।

     हमारे दार्शनिकों ने कहा है कि जिंदगी झाड़ू और पोछा दोनों का संयुक्त नाम है….। सुनकर आपको अजीब लगा... लेकिन यह दोनों ऐसी क्रियाएं हैं, जिनके बिना आपका दिन पूरा नहीं हो सकता।

       कचरा साफ करने के लिए झाड़ू घुमानी पड़ती है...और उस सफाई को स्थाई बनाने के लिए पोछा लगाना पड़ता है। जब झाड़ू लगा रहे हैं.... तो हमें आगे बढ़ना पड़ता है...और जब पोछा लगाते हैं….तो हमें पीछे हटना होता है ।बस... जिंदगी के साथ भी इस दृश्य को याद रखिए। जीवन की यात्रा में प्रतिफल दुर्गुणों की धूल परेशानियों के क़ण बिखरे होते हैं…..इन को दूर करने के लिए हमें झाड़ू लगाना है, इन सब को दूर हटा देना है, लेकिन इन दुर्गुणों और बुराइयों को साफ करने के लिए हमें पोछा भी लगाना पड़ेगा...जिसका नाम है पीछे हटना….आध्यात्मिक दृष्टि से मन की गंदगी बाहर निकालना झाडू जैसा है, और योग के माध्यम से अपने भीतर   उतरना….. पोछा लगाने की तरह है। जीवन की यात्रा में मन की सफाई के लिए हमें यह दोनों कदम उठाने पड़ते हैं।

निष्कर्ष

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में राजयोग मेडिटेशन नि:शुल्क सिखाया जाता है,जी हां..।ऐसी ध्यान प्रक्रिया, जिसमें पहले स्व अथार्त मैं कौन हूँ ( आत्मा ) का परिचय, फिर ईश्वर कौन है (परमात्मा )का परिचय। पूरा परिचय पा लेने के बाद थोड़े से अभ्यास से आत्मानुभूति और परमात्मा अनुभूति सहज ही होने लगती है.... जिससे स्व परिवर्तन स्वाभाविक हो जाता है, मन सशक्त हो जाता है , और व्यर्थ की बातों से मुक्त हो जाता है। और धीरे-धीरे मन डिटॉक्स होने लगता है यानी कि मन शांत, स्थिर, और निर्भय होने लगता है।
आज की इस भागदौड़ की जिंदगी में, जहां पर जिंदगी और मृत्यु का फासला बहुत कम रह गया है, ऐसे में हर व्यक्ति मानसिक शांति और स्थिरता की चाहत रखकर ब्रह्मा कुमारीज में विशेषतया मेडिटेशन कोर्स करने के लिए आते हैं और मानसिक स्वास्थ्य लाभ लेते हैं।
. आशा करती हूं आपको मेरा यह लेख "मन को भी डिटॉक्स करें " पसंद आया होगा, आप अपने विचार और अनुभव कमेंट बॉक्स में शेयर कर सकते हैं।
धन्यवाद। 🙏😊✍️


मेडिटेशन क्या है ? राजयोग मेडिटेशन क्या है? परमात्मा के साथ और कौन-कौन से संबंध निभाए जा सकते हैं?राजयोग मेडिटेशन  द्वारा हमें क्या-क्या प्राप्ति होती है? राजयोग मेडिटेशन को सीखने के लिए हम क्या करें? यह सब विस्तार से जानने के लिए मेरे साथ जुड़े रहे, मेरी पोस्ट अगर आपको अच्छी लगी हो,तो अपने जानने वालों से शेयर अवश्य करें....हो सकता है,इस वक्त किसी को इन चीजों की सख्त आवश्यकता हो।राजयोग मेडिटेशन सीखने के लिए अपने नजदीकी ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से संपर्क करें.

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