ओम शांति... नया साल शुरू हो गया है, और इसकी शुरुआत से ही हम सब खुश रहना चाहते हैं, बीते साल मे, कोविड-19 के हालातों ने पूरी दुनिया के सोचने का नजरिया बदल दिया | सब को यह समझ में आने लगा कि खुश रहने के लिए हमें किसी बड़ी चीज की जरूरत नहीं है.... खुश रहना हमारी अपनी चॉइस है | हमारी जिंदगी में कितनी भी कठिन परिस्थितियां हो, मुश्किलें हो, इसके बावजूद यदि हम यह तय कर लेते हैं कि हमें हर हाल में खुश रहना है, तो निश्चित ही हम हर हाल में खुश रहेंगे |कहा गया है "ख़ुशी जैसी ख़ुराक नहीं।"
"हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……
स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।
स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।
In This Article
- खुश रहना क्यों जरूरी है
- खुश रहना एक कला है
- खुशी कभी-कभी गायब क्यों हो जाती है
- खुशी के ग्राफ को बढ़ाने के 10 उपाय
- निष्कर्ष
खुश रहना एक कला है...जिसे हमें सीखना चाहिए... दलाई लामा ने अपनी एक किताब आर्ट ऑफ हैप्पीनेस में लिखा है कि खुश रहने या आत्मिक शांति के लिए.... आपको कहीं बाहर तलाश करने की जरूरत नहीं है, जो कुछ है वह आपके सामने और आपके भीतर है, बस आपको यह ध्यान रखना है कि ऐसी चीजों से अपनी खुशी की कल्पना ना करें, जो आपके पास उपलब्ध नहीं है।
खुश होने के लिए बहुत पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं होती, केवल अपनों का साथ और अपनों की सेहत... दिल के सुकून और खुशी के लिए काफी है, बीते साल में और कोरोना के डर के साए में हम सब ने घरों में और अपनों की छांव में ही सुकून पाया।
खुशी गायब होने के कारण
अपने जीवन में किसी लक्ष्य का होना अच्छी बात है। इससे हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिलती है, परंतु उन सपनों के पीछे दौड़ते रहना... जैसे तैसे उन्हें हासिल करने की कोशिश करते रहना.... लगातार सफलता के लिए फायदे की जगह नुकसान होना हमारे जीवन के संतुलन को बिगाड़ देता है... एक ही चीज के पीछे दौड़ते रहने से हमारा आत्मसम्मान कम हो जाता है, हमारे रिश्ते मंद पड़ जाते हैं, और हमारी कार्य क्षमता पर भी असर पड़ता है। हमारी ख़ुशी गायब होने लगती है।
हम अपने जीवन में खुद से, दूसरों से, हालात से, दुनिया से, लगातार उम्मीदें लगाते हैं, हम यह चाहते हैं कि सब कुछ हमारे हिसाब से हो..... पर वास्तव में ऐसा होता नहीं है... अपने मन मुताबिक काम ना होने के कारण हम बेचैन और परेशान हो जाते हैं.... एक बौद्ध गुरु ने कहा है कि जो है, उसे स्वीकार करके आगे बढ़ना हमें आजादी देता है, और इस आजादी से हमें खुशी मिलती है।
दिल में अगर गुस्सा, बेचैनी, शिकायतें हैं,.... हम कभी भी आजाद नहीं हो सकते, नतीजा हम खुश भी नहीं रह सकते। हम अपनी ख़ुशी की चाभी अक्सर दूसरों के हाथ में दे देते हैं जैसे...
- इन्होने ऐसा कहा इसलिये हम दुखी हैं...
- ये काम मेरे मुताबिक नहीं हुआ, इसलिये हम खुश नहीं....
- आप की वज़ह से मेरी ख़ुशी गायब हुई... आदि आदि
- दिन की शुरुआत परिवार के साथ मोहक मुस्कान से करें।
- अपने जीवन में प्राप्त हर चीज़ों के लिए परमपिता परमात्मा का धन्यवाद करें। कृतज्ञता बनाम धन्यवाद
- प्रकृति के साथ अपना समय व्यतीत करें, खुली हवा में सांस ले, खूबसूरत जिंदगी के लिए प्रकृति का धन्यवाद करें |प्रकृति का धन्यवाद
- काम शुरू करने से पहले व्यायाम करने की आदत डालें इससे शरीर में बनने वाला हैप्पीनेस हार्मोन डोपामाइन आपको आनंद में रखेगा।
- चिंता छोड़ चिंतन करें किसी ने आप के साथ गलत व्यवहार किया तो उसे माफ करें।
- आशावान बने, अपने दिल में नए दिन के लिए उम्मीदें और आशाएं भरे।
- तनाव से स्वयं को दूर रखकर अपनी पॉजिटिविटी से स्वयं को सामान्य रखें।
- अपना खान-पान सही रखें और अपनी पसंद के लोगों के साथ समय व्यतीत करें।
- सबसे पहले खुद का ध्यान रखना ही हमारी अपनी जरूरत होती है... काम से ब्रेक लेना हो या बाहर घूमने जाना हो, तो स्वयं के लिए यह काम जरूर करें।
- स्वयं के कार्यों के लिए समय अवश्य ही निकाले, वे कार्य जिन को करने से आपको खुशी मिलती है, जैसे संगीत सुनना, बागवानी करना., बच्चों के साथ समय व्यतीत करना, मेडिटेशन करना।
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