ओम शांति.... नया साल आ गया है और अपने साथ नये आगाज़ भी लाया है.....और इस मौके पर हर कोई अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए कुछ ना कुछ नए संकल्प करते हैं..... कुछ लोग सेहतमंद रहने के लिए सेहत से जुड़ी हुई कुछ अच्छी आदतें जैसे कि वजन घटाना, स्ट्रेस से दूर रहना, धूम्रपान छोड़ना इत्यादि के लिए संकल्प लेते हैं... तो कुछ लोग अपनी जिंदगी में कामयाबी हासिल करने के लिए नए नियम बनाते हैं.... कुछ लोग अपने रिश्तो को मधुर और मजबूत बनाने का संकल्प लेते हैं |
इस लेख में... नए साल में अमूमन हम नये संकल्प लेते हैं, लेकिन उससे पहले हमें अपनी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, उनके समाधान खोजने चाहिए, और फिर अपने संकल्पों की तरफ धीरे-धीरे छोटे छोटे कदम बढ़ाने चाहिए तो निश्चित ही सफलता मिलती है
"हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……
स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।
स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।
अब सवाल यह उठता है कि क्या संकल्प लेने भर से हमारी जिंदगी में सभी बदलाव आ जाते हैं? या आ जाएंगे? जिन की हमें जरूरत है..... अक्सर यह देखा गया है कि संकल्प तो कुछ ही हफ्ते बाद समाप्त हो जाते हैं, और जिंदगी फिर से पुराने ढर्रे पर चलने लगती है |
होता यूं है कि जिन समस्याओं के कारण हम संकल्प लेते हैं.... उनका समाधान निकालने की तरफ हमारा ध्यान नहीं जाता और यही चीजें हमारे खुश ना रहने की वजह बन जाती है... अपनी समस्याओं के प्रति हमें संकल्प लेने के बजाय सजग रहने की आवश्यकता है |अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए कुछ विकल्पों पर काम करना चाहिए... अपनी सोच को बदलना चाहिए.. ताकि हम गलत आदतों की तरफ ना मुड़ पाए जैसे कि धूम्रपान करना, ज्यादा खा लेना, शिकायतें करना, अपनी जिंदगी से असंतुष्ट रहना, सदैव नेगेटिव बातें करना इत्यादि |
सुख और दुख का खेल ही जिंदगी है... हम यह तो स्वीकार करते हैं कि जिंदगी में खुशी आती जाती रहती है... हम उसे कैद करके नहीं रख सकते... न ही कोई ऐसी दवा है, जो हमारी स्थिति को बदल दे.... जब जीवन में समस्याएं होंगी तो स्वाभाविक है कि उसका असर हमारी स्थिति पर पड़ेगा ही.... उपाय स्वरूप हम यह कर सकते हैं कि हम दुखी रहने का अनुपात कुछ कम कर दे.... हमें यह सीखना होगा कि हम अपने भीतर उत्पन्न तनाव को किस तरह कम कर सकते हैं और अपनी खुशी का ग्राफ बढ़ा सकते हैं | यदि हम अपने आप सेेेे कहेंगे हम खुश हैं तो निश्चित रूप से हम खुश रहेंगेेे... खुश रहना एक कला है जिसे हमें सीखना है... क्योंकि 80% लोग अपनी जिंदगी में खुश रहना चाहते हैं.... क्योंकि खुश रहना हमारी अपनी चॉइस है|
घर से जुड़ी कोई कठिन परिस्थिति हो, नौकरी संबंधी समस्या हो, तनावपूर्ण संबंध हो..।. हर जगह हमें कभी ना कभी दुख होता है और अर्थहीनता का बोध होता है। तो उस समय असहज करने वाले क्षणों को पहचानना ही हमारा पहला कदम है..... उन पलों में छोटे-छोटे ऐसे कार्यों को करें... जिससे हमें तुरंत अच्छा लगे... हमारे मन का भाव बदल जाए और हम स्वयं को सशक्त महसूस करें |
नए साल के संकल्पों की तरफ अपने कदमों को धीरे धीरे बढ़ाएं..... जी हां खुद से बहुत सारी उम्मीदें ना रखें, लेकिन हिम्मत का साथ ना छोड़े.... छोटी-छोटी सफलताओं को पाकर के, अपने भविष्य की राह को स्पष्ट देखने का प्रयास करें, इसके लिए आपको धैर्य की आवश्यकता होगी | सबसे पहले अपनी उन आदतों पर काबू पाएं, जो हैं तो बहुत छोटी..... लेकिन उन का प्रभाव हमारी रोज की जिंदगी पर पड़ता है जैसे..... टीवी और मोबाइल की स्क्रीन से अधिक चिपके रहना, गपशप में अधिक टाइम बिताना, देर रात तक जगना, दिन ढले तक सोते रहना, व्यायाम ना करना, बुरी आदतों का होना, दिनचर्या का तय ना होना, बहुत अधिक काम करना इत्यादि |
हर एक व्यक्ति की अपनी अलग आदत होती है...... इसका अर्थ यह है कि जो चीजें आपको अधिक दुख देती है, उन्हें नोट करें और साथ ही उन्हें कम करने की कोशिश भी करें.... जरूरी नहीं कि आप इन को पूरी तरह से खत्म करें, थोड़ा थोड़ा कम करके भी इनसे निजात पाई जा सकती है |
बेहतर जिंदगी हमारा हक है.... और हमें मिलनी ही चाहिए इसके लिए हमें जिन चीजों की जरूरत है... उसकी व्यवस्था करना ही संकल्पों को पूरा करना है.... अपनी इच्छाओं का सम्मान करें | अक्सर छोटी-छोटी चीजों के द्वारा हमारे मन की स्थिति में बदलाव आ जाता है.... जैसे कि बच्चों के संग खेलना, पार्क में घूमना, संगीत सुनना, पेंटिंग करना, हरियाली देखना, अपने छूटे शौक पूरे करना, इन सबको अपने रोजमर्रा के जीवन में शामिल करना चाहिए |
नववर्ष की असंख्य शुभकामनाएं...... जी हां... हम सब एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं.... और यह भी जानते हैं कि हर साल की तरह हम इस साल भी कुछ नई चुनौतियों और बाधाओं का सामना करेंगे.... लेकिन यह भी जान लें कि खुश रहना ही हमारा परम लक्ष्य है, और इसकी शुरुआत रोजमर्रा के छोटे-छोटे कार्यों से ही हो सकती है |
ओम शांति....क्या आप अपनी आर्थिक स्थिति से संतुष्ट नहीं है? या फिर पैसा आपके पास रुकता नहीं है? कहीं ऐसा तो नहीं कि अज्ञानता वश हम स्वयं ही अपनी धन संपदा को अपने से दूर कर रहे हैं........जी हां ! हर क्षेत्र में चाहे प्रत्यक्ष हो या परोक्ष हो, हमें प्रेम, कृतज्ञता आदि भाव देने पड़ते हैं, तभी ब्रह्मांड आकर्षण के नियम द्वारा हमारे पास सभी चीजों को बहुतायत में देता है, फिर चाहे वह जो भी चीज़े हों, धन संपदा हो या मधुर रिश्ते हों...या फिर..विस्तार से समझने के लिए पढ़ें..
धन के विषय में आपकी सोच आपको क्या परिणाम देती है
क्या कृतज्ञता द्वारा हम धन को आकर्षित कर सकते हैं
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