स्वदर्शन चक्र चलाइए ना!!

  

भगवान कृष्ण द्वारा सुदर्शन चक्र

 ॐ शांति… चलिए… आज हम स्वदर्शन चक्र अथार्त सुदर्शन चक्र फिराते हैं !!

शीर्षक देखकर आप यह सोच रहे होंगे,..  कि यह क्या कहा जा रहा है ? सुदर्शन चक्र हमारे पास कहां है? वह तो श्रीकृष्ण और विष्णुजी के हाथ में दिखाया जाता है….. जिससे उन्होंने असुरों और पापियों का संहार किया था !

In This Article
  • स्वदर्शन चक्र क्या है?
  • क्या स्वदर्शन चक्र एक आईना है?
  • ब्रह्मा कुमारीज में सुदर्शन चक्र का अर्थ
  • स्वादर्शन और सुदर्शन में अंतर
  • स्व दर्शन चक्र चलाने से मिलने वाले लाभ
  • स्वदर्शन चक्र - इंसान के अंदर की दिव्य आवाज
  • निष्कर्ष
"हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……
स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।
स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।



भगवान विष्णु जी के हाथ में सुदर्शन चक्र।

स्वदर्शन चक्र क्या है?

        जब हम इस धरती पर नहीं आए थे... तब हम कैसे थे? ... और जब हमने इस पृथ्वी पर जन्म लिया तो शुरुआत में हम कैसे थे?  और आज हम कैसे बन रहे हैं?  और हमें अब परिवर्तित होकर कैसे बनना है... इन सब को जानना और समझना और अनुभव करना ही स्व-दर्शन चक्र चलाना है! स्वदर्शन का अर्थ है:- स्व का दर्शन.. मैं कौन हूं?  और क्या हूं?  कहां से आया हूं? किस लिए आया हूं? 

  अब आप यह सोच रहे होंगे स्वयं को देखना…  यह कार्य तो हम आईने में कर ही लेते हैं, आईना देख कर के अक्सर इंसान सोचता है.. काश मैं सुंदर होता... काश मेरा रंग गोरा होता... मेरी आंखें सुंदर होती है... इस तरह से इंसान अपने भौतिक शरीर को ही आईने में देख सकता है | यदि उसे अपने स्वभाव का दर्शन करना हो,  तो वह किस आईने में देखेगा?  क्या ऐसा कोई आईना बना है…. जो उसे अपनी सोच प्रणाली और अपने संस्कार,  मान्यताओं का परिचय कराये,  दर्शन कराए,  क्या आपने कभी सोचा है !

क्या स्वदर्शन चक्र एक आईना है?

    

हम सब के पास एक आईना होता है... वह है यह संसार… यह आईने के समान है... समाज में आपके आसपास रहने वाले लोग और दिन प्रतिदिन होने वाली घटनाएं, रिश्तों को निभाना और जीवन की घटनाओं में मन में उठने वाले विचार ही वह आईना है | और इस आईने  में हम अपनी छवि तो नहीं देखते है…. बल्कि उसी में उलझ कर रह जाते हैं | सुदर्शन चक्र के द्वारा हम आत्म परीक्षण और आत्म दर्शन करते हैं |

ब्रह्मा कुमारीज में सुदर्शन चक्र का अर्थ

  

 ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में सुदर्शन चक्र का अर्थ है… 84 जन्मों के चक्र को समझना,  स्वयं को आत्मा समझ करके परमात्मा का वास्तविक परिचय पाना, स्वयं में आंतरिक गुणों,  सुख,  शांति,  आनंद,  पवित्रता,  खुशी आदि का अनुभव करना है |

सुदर्शन और स्वदर्शन में अंतर है.

 

एक तरह से देखा जाए तो  सुदर्शन और स्वदर्शन में अंतर है... सुदर्शन यानि कि शुभ दर्शन... जिसे  हम अपने दिमाग को बाहरी चीजों पर केंद्रित करते हैं…. भौतिकता को जिंदगी में लाते हैं..  जिसका सीमित अर्थ है | परंतु स्व-दर्शन का अर्थ व्यापक  है... स्वयं का दर्शन यानी कि स्वयं के विचारों पर, व्यवहारों पर, आदतों पर,  संस्कारों पर, उद्देश्यों पर, नजर रखकर करते हैं…. और स्व परिवर्तन करते हैं…. और आध्यात्मिकता और नैतिकता के साथ अपनी आंतरिक स्थिति पर कार्य करते हैं... इसके साथ साथ हम एक वास्तविक और अलौकिक खुशी का अनुभव करते हैं |

 स्व दर्शन चक्र चलाने से मिलने वाले लाभ

जब व्यक्ति स्व-दर्शन चक्र चलाता है तो ...

  1. जीवन को देखने का उसका नजरिया बदल जाता है,  और वह आईने में अपनी भौतिक सुंदरता को नही देखता !
  2. स्वयं को देख कर के यह नहीं सोचता है कि मेरी त्वचा कितनी सुंदर है...वह सोचता है.. मेरी यह त्वचा जो यह छिद्रों को खोल करके बहुत सारी प्राणवायु ले रही है।
  3. मेरा शरीर ब्रह्मांड की ऊर्जा को ग्रहण कर रहा है..
  4. मैं उन आंतरिक शक्तियों से अधिक सुंदर बन रहा हूं…
      इस तरह से एक साधारण समझ और सोच रखने वाला इंसान जीवन में घटने वाली घटनाओं के माध्यम से अपनी खोज करके चेतना के उच्चतम शिखर पर पहुंच जाता है| और स्व परिवर्तन के साथ साथ संपूर्ण समाज को भी बदल सकता है।           पारिवारिक झगड़े,  नौकरी की परेशानियां से, संबंधित तकलीफों से,  अलग-अलग क्षेत्रों में होने वाले अन्याय, नकारात्मक विचारों का अधिकता के प्रति उसका नज़रिया ही बदल जाता है… मुश्किलें क्यों आती है? .. यह कौन लाता है? क्या इनकी वजह हम ही तो नहीं?  क्या इनसे पार पाया जा सकता है?? इस सब की खोज करके निश्चित ही इससे उबर सकता है, इससे उसकी जिंदगी की मुश्किलें आसान हो जाती हैं |

इंसान के अंदर की दिव्य आवाज

स्वदर्शन चक्र - इंसान के अंदर की दिव्य आवाज



       हर एक इंसान के अंदर एक दिव्य आवाज होती है... जिसे वह अंतरात्मा की आवाज कहता है... जिससे उसे मार्गदर्शन मिलता है...लेकिन भौतिकता  की चकाचौंध और शोर में इंसान आत्मा की आवाज को सुनना नहीं चाहता | तो क्या आप  भी अपने भीतर की दिव्य आवाज सुनना नहीं चाहेंगे?? स्वदर्शन चक्र नहीं चलाना चाहेंगे? स्वदर्शन चक्र का यंत्र हम सबके पास है...स्वदर्शन चक्र की उस दिव्य आवाज़ का अनुसरण करके हम अपने पुराने संस्कार,  बुरी आदतों और वृत्तियों को छोड़ सकते हैं |

निष्कर्ष

अपने दैनिक व्यवहार में स्व दर्शन चक्र को हमें इस्तेमाल करना है। हमारी अंतरात्मा की आवाज हमें समय-समय पर उचित अनुचित, सही गलत का संकेत देती है। हमें इस संकेत को यूं ही नहीं छोड़ना है। इस आवाज को सुनकर हम अपने करने वाले कार्यों को सही गलत की कसौटी पर तौल कर करे। इससे हमारे सभी साधारण काम भी विशेष और महान बन जाएंगे जो हमें आंतरिक खुशी देंगे।
इस तरह के छोटे-छोटे प्रयोग जैसे कि हमारा व्यवहार किसी के प्रति गलत तो नहीं है? या फिर हम परिवार में गलत व्यवहार या बोल का इस्तेमाल तो नहीं करते? इन सब पर नजर रख कर के अथार्त स्वदर्शन चक्र चला कर के हम अपनी जिंदगी को खुशहाल सकते हैं।
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स्व दर्शन चक्र चलाने से व्यक्ति का स्वरूप बदल जाता है


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