- कृतज्ञता क्या है
- कृतज्ञता प्रयोग का मेरा स्वयं का अनुभव
- कृतज्ञता और विश्व की सर्वोच्च शक्ति
- पुस्तकें आपकी सच्ची साथी होती हैं
- निष्कर्ष
कृतज्ञता क्या है
कृतज्ञता बनाम धन्यवाद इसमें हमने समझा कि 'कृतज्ञता' सिंपल अर्थ में - धन्यवाद ..हमारी रोज की जिंदगी में तो शामिल होता है , लेकिन बहुत ही हल्के -फुल्के अर्थ में,. सामने वाले को हम दिन भर धन्यवाद करते हैं ! परंतु जब हम यह धन्यवाद ब्रह्मांड को, यूनिवर्स को, प्रकृति को या अलौकिक शक्ति को करते हैं, तब यह धन्यवाद कृतज्ञता में बदल जाता है, क्योंकि यह साभार या धन्यवाद, हमारे दिल से निकलता है | इसलिए कृतज्ञता और धन्यवाद दोनों में अंतर है - देखें कैसे?
कृतज्ञता प्रयोग के मेरे अनुभव
कुछ समय पहले यदि कोई मुझसे पूछता.. क्या मैं कृतज्ञ हूं? तब मेरा जवाब होता कि निश्चित ही मैं कृतज्ञ हूं |लेकिन सच्चाई यह है कि जरा भी कृतज्ञ नहीं हूँ क्योंकि तब मैं यह जानती ही नहीं थी कि सचमुच कृतज्ञ होने के क्या मायने है? कभी-कभी मौकों पर धन्यवाद कह देने भर से कोई इंसान कृतज्ञ नहीं कहला सकता|
कुछ साल पहले कृतज्ञता के बगैर मेरा जीवन ठीक-ठाक था ..जीवन में संतोष नहीं था ..आर्थिक स्थिति संतोषजनक थी... लेकिन जीवन तनावपूर्ण था | कहने को स्वस्थ थे , लेकिन हर मौसम में छुटपुट बीमारियां घेरे रहती थी, अधिक और कड़ी मेहनत के द्वारा चंद्र खुशियां ही मिल पाती थी.. ऐसा लगता था एक समस्या हटी और दूसरी आ गई. मैं जीवन में कुछ ढूंढ रही थी.. कुछ तो था जो जिंदगी से गायब था|
एक ऊर्जा, एक अलौकिक शक्ति, एक सर्वोच्च सत्ता, जिससे संपूर्ण विश्व चलाएं मान है ,उस पर अटूट विश्वास ही मेरा आस्तिक होना था,पुस्तके मेरी सच्ची साथी थी ,आंतरिक शांति मेरी खोज थी , मेरा लक्ष्य; कुछ तो ऐसा होना चाहिए जिसको अपना कर जीवन संतुष्ट और सरल बनाया जा सके.. साथ ही उसे आनंददायी भी बनाया जाए...और जीवन में कुछ गुण भी बढ़ते रहें!
पुस्तकें आपकी सच्ची साथी
कहा जाता है - पुस्तकों में आपको अपनी जिंदगी के हल मिल जाते हैं... हिंदू धर्म में तो यह मान्यता है कि जीवन में कैसी भी परिस्थितियां हों .. उनका हल पुस्तकों द्वारा, धार्मिक ग्रंथों द्वारा ढूंढा जा सकता है!! पुस्तकें आपकी सच्ची साथी होती हैं ,वो ही आपको आपसे मिलवाती हैं, स्वपरिवर्तन करवाती हैं |
मैं आपको बताऊं..मेरे जीवन के रहस्य, परत दर परत , पुस्तकों द्वारा खुलते गए.. स्वेट मार्टन ,सरश्री , रोंडा बर्न, जोसेफ मरफी, महात्मा गांधी आदि की पुस्तकों द्वारा ,अपनी खोज के फल स्वरुप, मैं हर दिन कृतज्ञता का अभ्यास करने लगी ..मेरे जीवन के हर एक पहलू में बदलाव आया... मेरा जीवन वाकई जादूइ बन गया था..
मेरा स्वास्थ्य, मेरी ऊर्जा, मेरी संतुष्टता ,मेरी खुशी, आश्चर्यजनक रूप से बढ़ गई ..आज मैं स्वयं को जितना अधिक सुखी और बेहतर महसूस करती हूं ...इतना मैं 20.. 25 साल पहले नहीं करती थी और खुशी तो इतनी महसूस करती हूं जितनी मुझे कभी संभव ही नहीं लगी!!
मुझे यह समझ में आया कि जीवन की सार्थकता तो जीवन के खूबसूरत लम्हों को इकट्ठा करने में है, ना कि सामान।
कृतज्ञता और विश्व की सर्वोच्च शक्ति
कृतज्ञता के इस ईमानदार और महान प्रयोग द्वारा आप विश्व की सर्वोच्च शक्ति परमपिता से सहज ही जुड़ जाते हो .. कृतज्ञता के इस सरल से प्रयोग द्वारा समझ में आने लगता है कि हमारी कुछ विशेष चीजें गलत क्यों हो गई? हमारी जिंदगी में क्यों नहीं आ पाई?
To be continue
कृतज्ञता प्रयोग के मेरे अनुभव -2
"कृतज्ञता प्रयोग के मेरे अनुभव -1" यह लेख आपको कैसा लगा? आप कमेंट बॉक्स में अपने विचार मुझे बता सकते हैं धन्यवाद🙏😊✍️
कृतज्ञता के साथ - साथ प्रेम और आकर्षण का नियम किस तरह काम करता है , इन सब के पीछे घूमते हुए हम अपने जीवन को किस तरह सहज और सरल कर सकते हैं ..इस विषय से सम्बंधित लेख निम्न हैं :----
प्रेमभाव व कृतज्ञता द्वारा प्राप्तियां
2 टिप्पणियाँ
बिलकुल सही कहा आपने, अच्छी पुस्तकें हमें सच्चा ज्ञान देती हैं। कहते हैं किताबों से दोस्ती कभी व्यर्थ नहीं जाती। बल्कि जीवन ही बदल कर रख देती है। आप ऐसे ही लिखती रहें। धन्यवाद
जवाब देंहटाएंThanks a lot🙏🙏
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