मन के हारे हार है मन के जीते जीत
- अपने मन पर निगाह रखें
- बेचैनी होने पर गहरी गहरी सांसे ले
- रिलेक्स होने के लिए प्राणायाम का सहारा ले
- मेडिटेशन को दिनचर्या बनाएं
- राजयोग मैडिटेशन
- निष्कर्ष
अपने मन पर निगाह रखें
मन एक चंचल बच्चा है। वह अपनी मनमानी करना चाहता है। माता-पिता की तरह हमें उसका ध्यान रखना है। अपने मन पर सुदर्शन चक्र चलाएं, यानी कि स्व+दर्शन, अपने मन में उठते विचारों को देखें। कई बार व्यर्थ विचार हमारे दिमाग में बार-बार आते हैं जिनका कोई औचित्य नहीं होता। जैसे...।
कई बार हम अपने सच से दूर भाग रहे होते हैं, हम नहीं जानते या जानना ही नहीं चाहते कि आखिर हम चाह क्या रहे हैं?
कई बार एक साथ दो विरोधी बातें हमारे मन में चल रही होती है,जैसे कि एक तरफ कहेंगे कि हम इस व्यक्ति को देखना नहीं चाहते, परंतु दूसरी तरफ हम यह कहेंगे कि वे हमसे बात क्यों नहीं कर रहे?
एक तरफ हम कहेंगे कि हमें किसी से कोई उम्मीद नहीं और दूसरी तरफ हम चाह रखते हैं कि वे हमारे लिए कुछ करें। इस तरह विरोधी बातें हमें उलझा देती हैं।
मन की ऐसी स्थिति में कुछ पल ठहरें,अपने विरोधी विचारों को देखें, कुछ देर उन विचारों के साथ समय बिताएं ।इसके बाद आपको समझ में आ जाएगा कि आपको क्या करना है! और यह विरोधी विचार आपको तंग नहीं करेंगे!
कई बार मन बहुत बेचैन है, कहीं टिक नहीं रहा,जहां है वहां अच्छा नहीं लग रहा है, तो ऐसी स्थिति में कुछ देर बाहर टहलने चले जाएं, बस खुले में टहलने लगे, अपने आसपास जो कुछ भी हो रहा है, उसे केवल देखना शुरू करें। केवल देखें, सोचे नहीं। लेखक शुनर्यु सुजुकी कहते हैं, " आगे और पीछे का दरवाजा खुला छोड़ दे विचारों को आने और बाहर निकलने दे, उनकी खातिरदारी ना करे। "
बेचैनी होने पर गहरी गहरी सांसे ले
केवल आध्यात्मिक और योग गुरु ही नहीं कहते, वरन सभी मनोवैज्ञानिक भी गहरी सांस लेने को एक थेरेपी मानते हैं। सांस लेना और छोड़ना आसान होता है...लेकिन जब मन बहुत बेचैन होता है… तो उसे विचारों से हटा करके कुछ देर गहरी सांस लेने के लिए तैयार करना... बहुत मुश्किल होता है, यही इसकी खासियत है।
ऐसी स्थिति में हमें यह देखना होता है कि आती जाती सांसों के साथ छोटे-बड़े कितने तरह के विचार हमारे भीतर चल रहे होते हैं! हर सांस के साथ गिनती करें, कुछ देर महसूस करें कि कैसा लग रहा है? शरीर में होने वाली हलचल को भी महसूस करें!
"हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……
स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।
रिलेक्स होने के लिए प्राणायाम का सहारा ले
योग आचार्यों ने प्राणायाम के द्वारा मन को शांत करना बताया है, वैसे तो सभी प्राणायाम हमारे मन की सेहत तथा तन की सेहत के लिए बहुत लाभदाई होते हैं। लेकिन भ्रमरी प्राणायाम मन को एकाग्र और शांत करने का अनूठा तरीका है। दोनों हाथ के अंगूठे से कान बंद कर ले, आंख के ऊपर उंगली रखें,और गहरी सांस लेकर के होंठ बंद करके गुंजन करें । खुले में बैठकर इस तरह गुंजन करना मन को शांत कर देता है । 5 से 10 मिनट तक अभ्यास करें। बस इसके बाद तुरंत आंखें ना खोलें । तन और मन में क्या हो रहा है? इसे महसूस करें, इस प्राणायाम से आप अपने भीतर बढ़ते मौन और शांति का अनुभव करते हैं ……गुंजन की ध्वनि आप हम्म्म, मम्म या ओमम्म रख सकते हैं।
मेडिटेशन को दिनचर्या बनाएं
आज का समय संकट से गुजर रहा है, उसका सामना करने के लिए हमारे पास अतिरिक्त उर्जा चाहिए जो हमें धैर्य,समझ प्रदान करें। हम लोग इनके आक्रमण से भयभीत न हों..। बल्कि उससे ऊपर उठने की क्षमता रखें । यह सारी शक्तियां हर व्यक्ति में है...और यह शक्तियां आती है सजगता से।
सजगता एक बहुत बड़ी शक्ति है। लेकिन उस को विकसित करने का किसी को ध्यान नहीं है, क्योंकि यह एक आंतरिक कला है, और इसके लिए हमें जरूरत पड़ती है मेडिटेशन की। मनुष्य एक शरीर है जिसमें भाव और बुद्धि है उसी प्रकार मनुष्य के शरीर में आत्मा भी है। जिसे हम भूल जाते हैं
जिस तरह शरीर का पोषण भोजन से होता है। उसी तरह आत्मा भी ध्यान से सशक्त होती है। उसमें सजगता आती है। आत्मा के सातों गुण जो धूमिल हो गए हैं…. वे निखरने लगते हैं... और परिणाम स्वरूप हमारा जीवन सुखी और मन शांत होने लगता है। मन में व्याप्त असंख्य कालिमा समाप्त हो जाती है। जीवन को देखने का हमारा नजरिया बदल जाता है। हमारे शरीर और आत्मा में एक तादात्म्य स्थापित हो जाता है। हमारा मन पानी जैसा हो जाता है। हालात के अनुसार पानी मुड़ना जानता है,और मोड़ना भी जानता है, आथार्त हमारी मन की सोच लचीली हो जाती है। उसमे हर परिस्थिति मे खुश रहने की कला विकसित हो जाती है,उस शक्तिशाली मन की मानसिकता विकासशील ही होती है।
राजयोग मेडिटेशन
योग का अर्थ है संबंध अथवा कनेक्शन जोड़ना
जैसे घर में लगी हुई बिजली की तारों का कनेक्शन बिजली घर की तार से जोड़ने के फल स्वरुप ही हमारे घर में रोशनी और ऊर्जा की प्राप्ति होती है, ठीक वैसे ही आत्मा का कनेक्शन परमात्मा के साथ जोड़ने से मनुष्य आत्मा को शांति,आनंद, लाइट और माइट की प्राप्ति होती है। यह कनेक्शन आत्मा रुपी तार को परमात्मा के साथ जोड़ने से, ईश्वरीय स्मृति में स्थित होने से, जुटता है।
निष्कर्ष
हम सभी चाहते हैं कि हमारा स्वास्थ्य बना रहे और मन सदा प्रसन्न रहे, इसके लिए शारीरिक और मानसिक संतुलन चाहिए और इस संतुलन की कड़ी को भरता है राजयोग मैडिटेशन।
स्वयं को आत्मा समझना और परमात्मा से प्रेम पूर्ण आत्मिक संबंध को ही राजयोग मेडिटेशन कहते हैं राजयोग मेडिटेशन में हम अपनी शक्ति को सर्वशक्तिमान परमात्मा के साथ केंद्रित करते हैं, साथ साथ उनके साथ संबंध जोड़ते हैं, तब उनकी सारी शक्तियां हमारे में प्रवाहित होने लगती है। ऐसा लगातार करते रहने से सकारात्मक ऊर्जा की एक श्रंखला हमारे मन में बनी रहती है। जिससे मन उन शक्तियों के प्रति जागरूक हो करके उसे अपने जीवन में उपयोग करने में समर्थ होता है।
'मन की अद्भुत शक्ति को पहचाने' इस आलेख में आप सभी के विचार और सुझाव आमंत्रित हैं।
संपूर्ण राजयोग को जानने के लिएअपने क्षेत्र के ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र में संपर्क करें और तन और मन को दुरुस्त बनाने की तरकीब अपनाये, और जीवन को सुख शांति से जिए।धन्यवाद 🙏😊✍️





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