दान देना ..निस्वार्थ उदारता


    
    हर व्यक्ति समृद्ध है! भरपूर है! दान देता है! यहां समृद्धि का अर्थ अमीरी से नहीं विशेषताओं से है, संसार में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं, जिसके पास कोई एक विशेषता भी ना हो। दान देने की प्रवृत्ति हम सबको बचपन मे ही सिखाई जाती है। sharing इसका आधुनिक रूप है।

In This Article
  1.  दान द्वारा धन का सदुपयोग
  2.  दान द्वारा अपार खुशी मिलना
  3.  दान द्वारा शारीरिक सेहत
  4.  दान द्वारा भावनात्मक सेहत
  5.  दान देना एक उपहार
  6.  दान द्वारा उद्देश्य प्राप्ति
  7.  दान आभारी बनाता है
  8.  देना यानि कि देवता बनना 

"हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……

स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।
स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।


दूसरों की मदद हमें भी ऊपर उठाती  है


ॐ शाँति.. साधारण अर्थ में दान का अर्थ है....धन संपदा, वस्त्र, फल फूल, आभूषण आदि को निस्वार्थ भाव से दान देना। प्राचीन काल से यह प्रथा चली आ रही है हमारे बुजुर्ग हम को कहते हैं कि दान देने से ईश्वर आपकी मनोकामना पूरी करते हैं और साथ ही आपका लोक और परलोक दोनों सुधरता है लेकिन 'देना' शब्द का साधारण अर्थ मदद है .. यह थोड़ा भिन्न है... किसी को कुछ देने के पीछे हमारी भावना यह नहीं होती कि हमें इसके बदले में कुछ मिले ! जब इन सब भौतिक वस्तुओं के साथ-साथ हम अभौतिक वस्तुएं... जैसे समय, संकल्प, शुभ भावनाएं, निस्वार्थ प्रेम आदि हम किसी को देते हैं तो उसे 'देना' कहते हैं जो हमें निरंतर ब्रह्मांड और प्रकृति से असीमित मिलता है। तो आइए पहले 'दान' या 'देना' में धन का महत्व समझते है।

देना... धन का सदुपयोग

   पैसे कभी आसानी से नहीं जुटते। मेहनत से एक पहाड़ चढ़े, तो राई बराबर फल हाथ में आता है, और यही राई अर्थात एक-एक पैसा जोड़कर के आदमी राई का पहाड़ बनाता है , लेकिन उसे कहां तक साथ ले जा सकता है.? लोग इस सच्चाई को जानते हैं कि अंत समय में व्यक्ति को खाली हाथ ही जाना है, लेकिन फिर भी येन केन प्रकारेण धन संपदा को इकट्ठा करने में अपने पूरे जीवन को व्यतीत कर देता है।
  धन को इकट्ठा करने में खुशी तो होती है, लेकिन धन के जाल में मन कई बार असहज हो जाता है। क्या सिर्फ धन कमाना ही मकसद है??
  आज के इस कोरोनावायरस समय में धनवान व्यक्तियों का धन धरा ही रह गया! उनकी जान नहीं बचा पाया, इसी तरह खूब सारे अमीर लोग धन छोड़ करके परमधाम चले जाते हैं,और उनके पीछे धन बगैर इस्तेमाल के रह जाता है । उसे कुछ लोग तो लूट कर ले जाते हैं, या फिर सरकार अपने कब्जे में कर लेती है।
  ऐसे बहुत से अमीर होते हैं, जिन्हें कोई नहीं जानता, जो बिना परोपकार दुनिया से चले जाते हैं, उन्हें पता ही नहीं होता कि उन्होंने धन क्यों कमाया? या धन का सदुपयोग कैसे होता है?

देना…. अपार खुशी मिलना 

  आपको याद है...जब आपने अपना समय, ध्यान या पैसा किसी को साफ मन और निस्वार्थ भाव से दिया था! तो आपने कैसा महसूस किया था.. यहां तक की शोध मानते हैं कि दया,करुणा,उदारता दिनांक 8 देना 18 देवता बन्ना के सभी काम, चाहे वह कितने ही बड़े छोटे क्यों ना हो, हमारे मन, शरीर और जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। इससे हमारी खुशी बढ़ती है।
 दूसरों को देने या उनकी मदद करने से ना केवल व्यक्ति को सकारात्मक भावनाएं प्राप्त होती है, बल्कि यह तुरंत.....देने वाले की मनोदशा और आत्मा को भी प्रभावित करता है।
 जब हमें किसी को कुछ देने का मौका लगे, तो सोचें कि किसी और की खुशी हमारे लिए कितना रोमांच लाएगी!!
  जब हम कहते हैं.... "क्या मैं आपकी मदद कर सकता हूं" तो हम अपने और दूसरों के लिए एक सकारात्मक ऊर्जा पैदा कर रहे होते हैं!!
क्या मैं आपकी मदद कर सकता हूं"


क्या मैं आपकी मदद कर सकता हूं"

 देना.. शारीरिक और भावनात्मक सेहत पर असर

  निस्वार्थ उदारता से देने से हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में भी वृद्धि होती है..। यह हमारे तनाव के स्तर को कम करने के लिए चमत्कार कर सकता है ! धन,समय और भावनाओं का दान हमारी शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार और दीर्घायु होने का एक कारण बनता है।

  साल 2003 में मिशीगन यूनिवर्सिटी द्वारा कराए गए एक शोध में भी पाया गया कि जिन लोगों ने दोस्तों रिश्तेदारों और पड़ोसियों को व्यवहारिक मदद प्रदान की या अपने जीवनसाथी को भावनात्मक सहायता दी... उनमें तनाव का स्तर काफी कम था और वे काफी खुश थे।

 देना... एक उपहार

 देना वास्तव में एक उपहार है, जो वापस देता रहता है, देना एक अच्छाई की लहर बनाने की क्षमता रखता है । सच तो यह है कि अच्छे काम सदा ही एक सकारात्मक क्रम बनाते चलते है. कई बार हम वृद्दाश्रम और अनाथालय में कुछ गतिविधियों के लिए पैसा, भोजन आदि देने के लिए प्रेरित होते हैं। इस अच्छे कार्य के योगदान को हमारे बच्चे,परिवार, पड़ोसी आदि जब देखते हैं, तो उन पर इसका सकारात्मक  प्रभाव होता है।


देना - एक उपहार



सहायता करना ख़ुशी देता है


 देना... आभारी बनाता है
 
बिना किसी स्वार्थ के किसी को कुछ देना या उनकी सेवा करना... हमें अपने जीवन में हर चीज के लिए अधिक विनम्र और आभारी बनाता है। पढ़े....कृतज्ञता.. इस तरह दाता और प्राप्तकर्ता दोनों ही कृतज्ञता की स्वस्थ भावनाओं को अनुभव कर सकते हैं। कृतज्ञता की भावना हमारे जीवन में जोश और उत्साह को दो गुना कर देती है। और शक्तियों को कई गुना कर देती है।

  बिना किसी स्वार्थ के किसी को कुछ देना या उनकी सेवा करना... हमें अपने जीवन में हर चीज के लिए अधिक विनम्र और आभारी बनाता है। पढ़े....कृतज्ञता.. इस तरह दाता और प्राप्तकर्ता दोनों ही कृतज्ञता की स्वस्थ भावनाओं को अनुभव कर सकते हैं। कृतज्ञता की भावना हमारे जीवन में जोश और उत्साह को दो गुना कर देती है। और शक्तियों को कई गुना कर देती है।

 देना... उद्देश्य को खोजना

  कई बार देने की प्रक्रिया के द्वारा हमें अपने उद्देश्य की प्राप्ति हो जाती है....यह हमारे दिमाग को स्पष्टता देता है, और साथ ही साथ भविष्य के लिए एक मजबूत उद्देश्य भी प्राप्त कर लेते हैं जीवन का उद्देश्य स्पष्ट हो जाने से शांति का अनुभव होने लगता है।
  इस तरह से किसी की मदद करना, और निस्वार्थ किसी को कुछ देना, मानसिक सेहत को भी बढ़ाता है 
चलिए हम आज के परिपेक्ष में कुछ बात करते हैं....इस करोना कॉल में ऐसे बहुत सारे व्यक्ति हैं, जिन्होंने इस कठिन समय में लोगों की भरपूर मदद की है...चाहे वह पैसे द्वारा किए हो, मेडिकल क्षेत्र में डॉक्टर, नर्स और स्टाफ ने 24 घंटे, स्वयं की परवाह न करते हुए लगातार अपनी सेवाएं मानवता को दी है।अनेक लोगों ने, संस्थाओं के साथ मिलकर के गरीब और कोरोना पीड़ितों  को घर-घर भोजन, दवाइयां उपलब्ध कराई है..।आज इंसान इस महामारी के खिलाफ, मानवता की रक्षा के लिए हर संभव मदद कर रहा है। बहुत सारे लोगों ने अपने क़रीबी को, अपने प्रिय जन को और अपने रिश्तेदारों को खोया है या फिर वह स्वयं ही इस महामारी से जंग लड़ रहा है... ऐसे में हमारे सांत्वना के दो बोल... "निश्चय ही आपकी विजय होगी,आप इस दुख से उबर जाओगे " इस युद्ध में उसके लिए अस्त्र साबित होता है।

 देना....अथार्त देवता बनना

हमारे हिन्दू धर्म में 33 करोड़ देवी देवता कहे गये हैं। आप ध्यान से देखें तो पाएंगे कि सभी देवी देवताओं के चित्रों में उनके हाथ आशीर्वाद या देने की मुद्रा में हैं।
ब्रह्माकुमारिस इश्वरीय विश्वद्यालय मे देवता अथार्त "देने वाला" बनने का पाठ पढ़ाया जाता है। सिर्फ धन ही नहीं... बल्कि समय पर सांत्वना और हिम्मत के दो बोल, निराश व्यक्ति की आशा को जगाते दो शब्द, आत्मा की शक्ति को जगाते दो वाक्य, सम्पूर्ण पृथ्वी के लोगों के लिए असंख्य शुभकामनायें देना ही वास्तव में देवताओं का काम है।
 धन की सफलता यही है कि वह अमीर गरीब के बीच भेद मिटा दे, इंसानों के बीच की असमानताओं का अंत कर दें, और पृथ्वी पर शांति और इंसानों के बीच सद्भावना लाए।
  परोपकार वही है, जो जीवित रहते हुए किया जाए। जो करना है,अभी कीजिए, दुनिया को अभी जरूरत है, गरीब इंतजार नहीं कर सकते, भूखों के पास वक्त नहीं होता।

  एक उदाहरण....यहां हम उन एक उद्यमी चार्ल्स फ्रांसीसी फीनी का जिक्र करेंगे। फीनी ने अपनी मां को भी दान करते देखा था और जो खुशी चेहरे पर होती थी, उन्हें वह याद है । डेल कार्नेगी के लेख 'वेल्थ' ने तो फीनी को मानव जीवन की नई दिशा ही दे दी। उन्होंने अटलांटिक नाम की एक परोपकारी संगठन की स्थापना की और कार्नेगी के इस लक्ष्य को सामने रखा कि धन का सबसे अच्छा उपयोग दूसरों की मदद करना है। फीनी दान या मदद में एक शर्त रखते थे कि उनका नाम कहीं नहीं आना चाहिए। फीनी के इस परोपकार को 15 वर्ष छुपाने का क्रम सफलतापूर्वक चला, लेकिन जब दान अरबों में पहुंचने लगा, तब उनकी महिमा छिपने ना पाई .. उनका कहना कि जो करना है, अभी कीजिए, दुनिया को अभी जरूरत है। उन्होंने कई देशों में उच्च शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और वैज्ञानिक अनुसंधान को सशक्त करने में जोर लगा दिया । अमेरिका ही नहीं दुनिया भर में उनके जैसा कोई दानी नहीं।
  आज अगर वियतनाम सफलतापूर्वक कोरोनावायरस का सामना कर रहा है, तो उसमें चार्ल्स फ्रांसिसी
(fenney) फीनी का बड़ा योगदान है।
'दान देना ..निस्वार्थ उदारता ' इस लेख को पढ़ते हुए आपके मन में कोई सुझाव आता है, तो आप कमेंट बॉक्स में मुझे बता सकते हैं, आपके सुझाव और विचार मेरे लिए निश्चित रूप से अमूल्य हैं।
धन्यवाद 🙏😊✍️
















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