मोबाइल और बच्चे
ओम शांति.. आज के समय में मोबाइल तकनीक के इस्तेमाल में बच्चे बड़ों को मात दे रहे हैं!! यह तो आप सभी अच्छे से जानते हैं। कुछ प्रतिशत बच्चे, अगर इस मोबाइल तकनीक से थोड़ा दूर थे….तो वह भी इस करोना कॉल में फोन से जुड़ गए। ऐसे कठिन समय में माता पिता और अभिभावक भी क्या करते? देश विदेश में सभी बच्चों की कक्षाएं ही इसी पर निर्भर हो गई हैं। एक शोध में पता चला है कि 75 परसेंट बच्चे दिन भर में 4 घंटे से ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं! दिनोंदिन बच्चों में मोबाइल फोन का क्रेज़ बढ़ता ही जा रहा है, जो कि चिंतनीय है।
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कुछ खास वजहें,जिससे बच्चों में मोबाइल फोन की आदत पड़ती है।
क्या बच्चों द्वारा फोन इस्तेमाल करना उचित है, रिसर्च क्या कहती है?
बच्चे जो हमारे देश के भावी नागरिक हैं ! क्या मोबाइल फोन उन्हें बीमार बना रहा है?
बच्चों को मोबाइल फोन के खतरों से कैसे बचाया जाए।
आज के इस विकसित और और तकनीकी युग में मोबाइल फोन का इस्तेमाल सभी के लिए अत्यंत जरूरी हो गया है, स्मार्टफोन और उसमें इंटरनेट ने हमारे सभी कामों को बहुत आसान कर दिया है, दूरियां समाप्त हो गई है, हमारा समय बहुत बचने लगा है। और उस बचे हुए समय को सदुपयोग करने के बजाए हम फिर से स्मार्ट फोन में लगाने लगते हैं..। मोबाइल और इंटरनेट की चमकती दुनिया पढ़ें। लिहाजा बच्चे भी इसकी चमक-दमक और आकर्षण के जाल में उलझे जा रहे हैं।
कुछ ख़ास वजहें जिससे बच्चों में मोबाइल फोन की आदत पड़ती है।
यह तो सभी को पता है, बच्चा पैदा होने के 2 और 3 माह के बाद अपने आसपास की चीजों,वातावरण की आवाज़ों आदि के प्रति अत्यधिक आकर्षित होता है। 4 से 5 माह के बाद बच्चा आकर्षित करने वाली चीजों को पकड़ने की कोशिश करता है। मोबाइल फोन के रंग बिरंगे अल्ट्रावायलेट किरणें बच्चे को अपनी ओर आकर्षित करती है। साथ बैठे माता-पिता के द्वारा फोन इस्तेमाल करने पर वह उसको लेने का प्रयास करता है। और वह यह भी देखता है कि छूने से इसके रंग में बदलाव होता है। माता-पिता भी बच्चे को खुश देख कर के उसे कुछ मिनट फोन से खेलने देते हैं....।नतीजा यह कुछ मिनट धीरे धीरे, बच्चे के बड़े होने के साथ-साथ घंटे में बदलने लगते हैं। 1 साल होते होते बच्चा फोन के काफी सारे फंक्शन समझने लगता है। फोन ना मिलने पर वह नाराज होता है, रोता है, जिद करता है। और माता-पिता भी अपने काम के चलते " बच्चा फोन से खेल रहा है खुश है " यह देख कर संतुष्ट हो जाते हैं, निश्चिंत हो जाते हैं.
यहीं से धीरे-धीरे बच्चे मे मोबाइल फोन की आदत पड़ने लगती है।
क्या बच्चों द्वारा फोन इस्तेमाल करना उचित है, रिसर्च क्या कहती है?
ब्रिटिश रिसर्च एक विस्तृत शोध की तैयारी में है कि क्या मोबाइल फोन या अन्य वायरलेस उपकरणों से बच्चों के दिमाग के विकास पर प्रभाव पड़ता है? यह तो सिद्ध हो चुका है कि मोबाइल फोन का विकिरण अथार्त रेडिएशन मानव, उसके स्वास्थ्य और वातावरण पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। अवसाद,तनाव,प्रतिरक्षा प्रणाली में बीमारियों का उत्पन्न होना, दृष्टि का कमजोर होना, भावनात्मक समस्याएं होना आदि इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।
हमारे भावी नागरिक यानी कि बच्चे, अपरिपक्व मस्तिष्क और शरीर वाले बच्चे, जो अपना अधिकतर समय इन मोबाइल फोन के साथ बिताते हैं….यहाँ तक कि किशोर उम्र के बच्चों के साथ साथ चार-पांच साल के छोटे-छोटे बच्चे भी मोबाइल फोन और इसके अन्य उपकरण प्रयोग करने में अधिक समय बिताते हैं।
बच्चे जो हमारे देश के भावी नागरिक हैं ! क्या मोबाइल फोन उन्हें बीमार बना रहा है?
स्मार्टफोन के संपर्क में आने से बच्चों के दिमागी क्षमता के साथ-साथ मानसिक विकास भी ठीक से नहीं हो पाता है….क्योंकि वह इसका प्रयोग नकारात्मक ऊर्जा के रूप में करने लग जाते हैं। मोबाइल से निकलने वाली रेडियो तरंगे, दिमाग पर गहरा प्रभाव डालती हैं, और उससे सुनने की क्षमता कम कमजोर होने लगती है।
बच्चों की आंखों पर मोबाइल फोन का प्रभाव सर्वविदित है।आज आयु से पहले ही बच्चों की दृष्टि कमजोर हो जाती है। और आप छोटे-छोटे बच्चों को नजर का चश्मा लगा हुआ देखते हैं।
- खेलकूद की गतिविधियां कम होने के कारण बच्चे अपने कमरों में अधिकतर बैठे रहते हैं,जिस कारण बच्चों में आपसी स्नेह, मिलना जुलना कम होता जा रहा है, नतीजा बच्चों में मोटापा और चिड़चिड़ापन हावी हो रहा है।
- अत्यधिक फोन के इस्तेमाल के कारण बच्चों में अनिद्रा और अकेलेपन से वे तनाव के शिकार हो रहे हैं।
- फोन का निरंतर प्रयोग करने से गर्म होने पर इसमें विकिरण की शक्ति से नुकसान कई गुना बढ़ जाता है, जो बच्चों के दिल और दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
- मोबाइल फोन के अत्यधिक प्रयोग से उनकी एकाग्रता में कमी आई है।
- मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल से माता-पिता के द्वारा रोकने पर बच्चों के व्यवहार में गुस्सा और आक्रामकता दिखाई देने लग पड़ी है।
- मोबाइल की रेडिएशन के कारण बच्चों की सोचने की क्षमता में कमी आ गई है, स्मरण शक्ति में भी कमी आने लगती है।
- दिनोंदिन हाईटेक होती टेक्नोलॉजी और उसकी सरल उपलब्धता के कारण बच्चों के पढ़ने का तरीका ही बदल गया है। अब बच्चे को हमारी,आपकी तरह पढ़ने के लिए दिमाग नहीं लगाना पड़ता।अब वे प्रत्येक कार्य के लिए मोबाइल पर आधारित होते जा रहे हैं, जिससे उनके सामान्य ज्ञान पर भी प्रभाव पड़ता है।
- मोबाइल फोन के कारण आज के बच्चे काल्पनिक जीवन में अधिक जीते हैं, वे वास्तविक मित्र बनाने की अपेक्षा वर्चुअल मित्र बनाने लग पड़े हैं।
- वास्तविक दुनिया से दूर, चमक दमक वाली यह मोबाइल की दुनिया धोखे से पूर्ण होती है। इन्हीं में वे अपने सपने बुनने लगते हैं। इन सपनों के टूटने पर वे बच्चे डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। जो उनके भविष्य के लिए हानिकारक साबित होता है।
बच्चों को कैसे मोबाइल, स्मार्टफोन से होने वाले खतरों से बचाया जाए?
जब पहली बार बच्चे को स्मार्टफोन दे तब उनकी कार्यशैली, स्वास्थ्य और विचारों पर ध्यान दें ताकि प्रारंभ से ही बच्चे इसके प्रयोग के प्रति सावधानी बरतें और किताबों पर अधिक ध्यान दें।
दिन की अपेक्षा रात में बच्चों को फोन से दूर रखें।
बच्चों से झूठे वादे ना करें कि यह कार्य करने के बाद आपको मोबाइल मिलेगा….इस तरह का व्यवहार मोबाइल ना देने पर आपके प्रति बच्चों के मन पर नकारात्मक भाव पैदा करेगा।
बच्चों से मोबाइल लेना है, तो डांट डपट, मारने पीटने के बजाय उन को रचनात्मक कार्यों में लगाना ही सही समाधान है।
माता-पिता बच्चों को अपना अच्छा समय देकर के भावनात्मक रूप से जुड़कर, उनके विचार जानने, समझने और समस्या का समाधान करें, ताकि दोनों में विश्वास बढ़े।
बच्चे के साथ खेलें। प्रकृति के साथ उसका परिचय कराएं रचनात्मक कार्यों द्वारा बच्चे को क्रियाशील बनाएं।
बच्चों के फोन पर ध्यान रखें कि बच्चा शिक्षा की आड़ में गलत वेबसाइट का शिकार तो नहीं हो रहा? या इंटरनेट का प्रयोग किस तरह कर रहा है?
बच्चों का परिचय ज्ञानवर्धक पुस्तकों, महापुरुषों के चरित्र से करवाएं ताकि वह उनसे सकारात्मक शिक्षा लेते हुए आगे बढ़े और उनका शारीरिक विकास भी सही तरह से हो।
"हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……
स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पिछले 20 वर्षों मे मोबाइल फोन से संबंधित खबरों पर कई शोध किए जा चुके हैं। ब्रिटिश स्वास्थ्य पॉलिसी के अनुसार 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों को केवल बहुत जरूरी कार्य हेतु मोबाइल फोन का प्रयोग करना चाहिए, जितना संभव हो टेक्स्ट मैसेज को प्राथमिकता देनी चाहिए। और हां...अगर हमारे घर में छोटे बच्चे हैं तो हम सचेत हो जाएं ! और हमारा यह कर्तव्य भी बनता है कि बच्चों में मोबाइल के बढ़ते क्रेज को कम करने के लिए उनका ध्यान ऊपर दी गई गतिविधियों और रोचक कार्यों में लगाएं।
तो फ्रेंड्स, " बच्चों में मोबाइल फोन का बढ़ता क्रेज़" यह लेख आपको कैसा लगा? इस पोस्ट से रिलेटेड जो भी सुझाव आप देना चाहते हैं, आप कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं, हमें आपके सुझावों का इंतजार रहेगा।
धन्यवाद 😊🙏✍️




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