राजयोग मैडिटेशन क्या है- 2

 

आत्मा, ज्योति बिंदु स्वरूप 


 ओम शांति....राजयोग जीवन जीने की एक ऐसी कला है, जिसके माध्यम से जीवन की वास्तविकता  का आभास होता है, राजयोग द्वारा किस प्रकार मनुष्य के जीवन में क्षमताओं का, शक्तियों का, विकास किया जाए...... जिससे मनुष्य जीवन जीने की संपूर्ण विधि को जान सके.....और अपने जीवन के वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त कर ले।

In This Article
  1.  योग और राजयोग का सरल अर्थ
  2.  राजयोग  में संबंध निभाना
  3.  राजयोग के साथ-साथ परिवार समाज और दैनिक व्यवहार
  4.  राजयोग कैसे करें
  5.  मैं कौन हूं? आत्मा का सत्य परिचय 
  6.  शरीर के पांच तत्व कौन से होते हैं 
  7.  आत्मा के 7 गुण कौन से होते हैं
  8.  निष्कर्ष 
"हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……
स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।
स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।

योग और राजयोग का सरल अर्थ

  योग का यदि सरल अर्थ किया जाए तो योग माना मिलना.... संबंध जोड़ना। मनुष्य का संबंध अनेक स्तरों पर होता है,जैसे भौतिक वस्तुओं के साथ भौतिक योग, मनुष्यों के साथ लौकिक योग, इष्ट देवों के साथ अलौकिक योग आदि आदि। इन सब योगों में राजयोग को सर्वश्रेष्ठ योग माना गया है...क्योंकि राज योग में आत्मा का संबंध पिता परमात्मा के साथ होता है...यह संबंध आध्यात्मिक स्तर का योग है, इसलिए इसको सर्वश्रेष्ठ योग कहा जाता है।
     राजयोग के बारे में कहा गया है कि यह राजाओं का राजा बनाने वाला योग है। योग द्वारा सर्वप्रथम हम अपनी इंद्रियों  पर राज्य करना सीखते हैं...कहा गया है कि 'मन के जीते जगत जीत' यानी कि जिसने मन को जीत लिया, उसने मानो सारे जगत को जीत लिया और इंद्रजीत बन गया।
      हम आज तक भगवान को याद करने की कोशिश तो बहुत करते हैं, परंतु याद में मन नहीं होता...फिर हम मन को दोषी बना देते हैं कि मन बड़ा दुष्ट है, मन बड़ा पापी है, मन बड़ा नीच है, यह बस में नहीं हो रहा!
      इसके लिए हमें यह जानना चाहिए कि मन की लगाम इंद्रियां है, यह इंद्रियां मेरी अपनी है.... जितना हमारा इन इंद्रियों के ऊपर नियंत्रण होगा, उतना ही मन हमारे बस में होता जाता है, परंतु आज के युग में इंसान इंद्रियों का गुलाम बन गया है, राजयोग हमें इंद्रियों के ऊपर नियंत्रण करने की कला सिखाता है, और वास्तव में यही जीवन जीने की कला भी है।
      इसके लिए हमें कोई घर से परे होने की आवश्यकता नहीं है..क्योंकि अक्सर मनुष्य यह सोचने लगता है कि मन को वश करने के लिए इस दुनिया से दूर जंगल में अथवा किसी गुरु की शरण में जाना होगा अन्यथा इस दुनिया में रहकर मन को वश में करना संभव ही नहीं है !!
      गीता शास्त्र इसी बात का प्रमाण है कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए सांसारिक जीवन जीते हुए भी हम इस विद्या को सीख सकते हैं !! इसलिए राजयोग दुनिया में सिखाए जाने वाले सभी योगों में सर्वश्रेष्ठ है। इस योग में सभी योग समाए हुए हैं, जैसे कि ज्ञान योग,भक्ति योग,कर्म योग,सन्यास योग,समग्र योग,हठ योग आदि आदि।
     आज हर तरफ पूजा-पाठ बढ़ रहा है, मंदिर बढ़ रहे हैं, कर्मकांड बढ़ रहे हैं, परंतु भक्ति का अनुभव नहीं हो रहा है, आज के भक्तों की भक्ति में ना तो संबंध है, और ना ही सच्ची दिल की प्रीत है, और जो थोड़ी प्रीत दिखाई देती है वह भी स्वार्थ की प्रीत है। उसका सच्चा नाता परमात्मा के साथ क्या है,वह तो भूल चुका है !! अगर इंसान से पूछा जाए के भक्ति करने के बाद आप संतुष्ट हैं? तो जवाब होगा कि सब कुछ करते हुए भी मन संतुष्ट नहीं है....अथार्त कहीं कोई कमी है !

राजयोग में सम्बन्ध निभाना 

     जब तक हमारा संबंध  प्रभु के साथ नहीं जुटेगा....तब तक दिल की प्रीत हो नहीं सकती। जब हमारा प्रभु के साथ संबंध स्थापित हो जाता है, तब वह भक्ति का रूप ले लेता है, और दिल ही दिल में उससे बातें होने लगती है....राजयोग में चिंतन मनन और प्रभु के साथ सर्व संबंधों को विस्तार से जानने के लिए पढ़ें:-

राजयोग के साथ साथ परिवार, समाज, दैनिक कार्य व्यवहार 

       राज योग को करने के लिए हमें किसी कर्म का त्याग नहीं करना पड़ता है...बल्कि कर्म में ही योग समाया हुआ होता है। योग माना एकाग्रता..।जब हमारे कर्मों में एकाग्रता आने लगती है ...हमारा हर कर्म श्रेष्ठ कर्म, शुद्ध कर्म बन जाता है, उसमें शक्ति भर जाती है। इसलिए इस योग को सन्यास योग भी कहा गया है, लेकिन अगर मनुष्य दुनिया का सन्यास करके जंगल में चला जाए और वहां भी बैठे बैठे उसे दुनिया की याद आती है कि मैं यह सब छोड़ कर आ गया, मेरे पास अथाह धन वैभव था,तो क्या वह सन्यास कर पाएगा ?
       सन्यास हमें बुराइयों का करना है..संसार का नहीं। क्योंकि राज योग तभी संभव है, जब बुराइयों का, विकारों का, कमजोरियों का सन्यास किया हुआ हो। हमें इन सब का मन से सन्यास करना है...भले हम घर गृहस्थी में रहे...उनमें जो बुराइयां आ गई है, उनका त्याग कर अच्छाइयों को जीवन में धारण करें...वास्तव में यही सन्यास योग है.... कई लोगों ने इसे हठयोग का नाम भी दिया है!!

 राज योग कैसे करें

 राज योग तभी संभव है.... जब आत्मा और पिता परमात्मा का संपूर्ण ज्ञान हो, आत्मा को हम सभी जानते हैं, मानते भी हैं कि इस शरीर में यह एक चेतन शक्ति है, जो इस शरीर को चला रही है, यह शरीर हड्डी मांस का एक पिंजरा है,  जब आत्मा इस शरीर को छोड़ देती है,  तब शरीर मुर्दा हो जाता है, आत्मा अजर, अमर, अविनाशी शक्ति है, आत्मा का कभी विनाश नहीं होता। यह सब ज्ञान तो हमारे पास है ...परंतु ऐसा क्या है जिसे हम नहीं जानते ?

Who am I..... मैं कौन हूँ? आत्मा का सत्य परिचय 

     राजयोग हमें अंतर जगत की यात्रा कराता है, जहां हमें अपने मन को उस यात्रा में भीतर  एकाग्र करना होता है.... जितना बाह्य संसार विशाल है, उतना ही भीतरी संसार भी विशाल है.... जिसे आउटर और इनर स्पेस कहा जाता है....लेकिन यह इनर स्पेस बिल्कुल गुप्त है। बाह्य जगत को जानने में इतने वर्ष लग गए। लेकिन भीतर का जगत इतना विशाल है कि इस बात को अभी हमने समझा नहीं है।.... क्योंकि जो इन सभी बातों का फाउंडेशन है..... वह है.... Who am I.?   मैं कौन हूं ? इस बात को अभी समझा नहीं है ।
     यह जीवन एक योग ही है....जहां शरीर और आत्मा का संबंध हुआ, मिलन हुआ। अकेली आत्मा है, तो भी जीवन नहीं है।अगर अकेला शरीर है, तो भी जीवन नहीं है। जीवन अर्थात जहां शरीर और आत्मा का मिलन हो।

शरीर के पांच तत्त्व कौन से हैं 

        यह तो हम सभी जानते हैं कि शरीर की वास्तविकता पांच तत्व हैं। और शरीर में जीवन के लिए उन पांचों तत्वों की मांग  होती है..... जैसे कि शरीर की बनावट में ऑक्सीजन है...ऑक्सीजन अगर नहीं है तो उसके बदले में दूसरी कोई गैस हो तो नहीं चलेगी, ऑक्सीजन ही चलेगी। प्यास लगने पर पानी ही चाहिए।जीवन जीने के लिए एक भी तत्व कम हो जाए तो जी घबराने लगता है, और बेचैनी महसूस होने लगती है, इसलिए कुदरत ने सभी को पांच तत्व समान रूप से दिए हैं, जिस क्वालिटी का पानी, प्रकाश, हवा भारत में है,  उसी प्रकार का अन्य देशों में भी है, कुदरत ने कोई भेदभाव नहीं किया।

आत्मा के 7 गुण कौन से हैं 

        यह तो हुई शरीर  की वास्तविकता.....।इसके अंदर जो चैतन्य शक्ति ....हमारी आत्मा है. क्या हमने उसकी वास्तविकता को जाना? शरीर की वास्तविकता के लिए ...पांच तत्व है , परंतु आत्मा को जीवन जीने के लिए चाहिए शांति सुख। लेकिन सुख और शांति काफी नहीं है, आत्मा को चाहिए यह सात चीजें.... जो गुण रूप में है। इसलिए आत्मा को सतोगुणी कहा जाता है, वह 7  गुण है...शांति, सुख, प्रेम, शक्ति, ज्ञान, शुद्धि और आनंद। यह 7 गुण आत्मा की वास्तविकता है !!

      
    इंसान कहता है, सूखी रोटी है! चलेगा.... सादा जीवन हो, तो भी चलेगा.…..परंतु शांति चाहिए। यदि 56 प्रकार के भोग रखे हो और उसी समय किसी ने अशांति मचा दी, तो एक भी पदार्थ आपसे खाया नहीं जाएगा!  यानि कि भोजन जो शरीर के लिए आवश्यक है.... उससे भी अधिक आवश्यकता 'आत्मा को शांति' की है !

     इंसान कहता है, अगर महल ना भी हो, यदि छोटा सा घर है, तो भी चलेगा क्योंकि सुख से जीवन जीना चाहिए।  यहां भी शरीर की आवश्यकता घर से ज्यादा 'आत्मा को सुख' चाहिए।  किसी आत्महत्या कर लेने की चाहना रखने वाले व्यक्ति से आप जाकर पूछो कि आपको किस चीज की कमी है तो वह यही कहेगा कि ईश्वर की कृपा से हमें सब कुछ है...परंतु जीवन में सुख नहीं है, शांति नहीं है, बहुत दुख है।
 जीवन का अर्थ है जहां प्रेम हो, शांति हो, आनंद हो..। वहां पर ही जीवन है।
   
      भगवान के पास जा कर के हम प्रार्थना में यही कहते हैं...। हे प्रभु अज्ञान से हमें ज्ञान की ओर ले चलो ! अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। भारत में ना तो शास्त्रों की कमी है ना ही ज्ञान सुनाने वालों की !! ज्ञान होने के बाद भी अज्ञानता है क्योंकि रोशनी नहीं है....हम प्रभु से शक्ति मांगते हैं कौन सी शक्ति,? आत्मशक्ति....विल पावर। हम प्रभु से कहते हैं कि हमारे मेले मन को शुद्ध कर दो.....उसके लिए हम गंगा स्नान करते हैं, अनेक कर्मकांड करते हैं,  व्रत उपवास करते हैं,  मंत्रोचार, मंत्र जाप करते हैं......परंतु सच्चा आनंद और आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति.....हमें क्यों नहीं मिल पा रही है  ?  वास्तविक आनंद को हम भौतिक वस्तु में तलाश कर रहे हैं...... क्योंकि यह सातों गुण आज आत्मा से परे हो गए हैं जो आत्मा के लिए आवश्यक हैं।
   
     जब आत्मा परमात्मा के पास से इस धरती पर आती है......उसमें यह सातों गुण विद्यमान होते हैं। जब बच्चा पैदा होता है, तब वह कितना शुद्ध और पवित्र माना जाता है,  जब वह सोता है, तो कितना शांत नजर आता है...। उसके जैसा सुखी, आनंद स्वरूप कोई नहीं लगता, उस बच्चे को महात्मा समान ज्ञानी माना जाता है.....यही जीवन की सुंदरता है, सत्य है।
   
    यही सत्य और सुंदरता हमारे जीवन में आ जाए तब जीवन जीने का जो आनंद है, वह अनोखा और अलौकिक अनुभव होगा, जब हमें यह स्मृति जागृत रहेगी कि मैं आत्मा हूं....प्रेम स्वरूप, शांत स्वरूप, आनंद स्वरूप तो वह हमारे व्यवहार में स्वत: ही आने लगेगा। इंसान एक दूसरे से यही आशा करता है कि यह सुख से, प्रेम से, शांति से जीवन जिए और हमें भी ऐसे ही जीने दे परंतु फिर भी ऐसा हो नहीं पाता है क्योंकि जीवन का यह नियम है कि जो चीज हमें अन्य लोगों से चाहिए....उसे भी वही चीजें हमसे चाहिए।

आत्मा को सातों गुणों से भरपूर करने का नाम है - राजयोग मैडिटेशन

      आज हमारी आत्मा ख़ाली हो गयी है कारण....जीवन की आपधापी में हमने आत्मा को भोजन (उसके 7 गुण, जिनके द्वारा वह महान आत्मा बनती है) देना बंद कर दिया...नतिज़ा हमारी आत्मा की बैटरी डिस्चार्ज हो गयी !! मन, बुद्धि जो आत्मा के अंग  है...उन्होंने अपना कार्य करना कम कर दिया जैसे कि मन ने आत्मा की बात मानना बंद कर दिया....मनमानी करने लगा ! और बुद्धि की निर्णय शक्ति समाप्त होने लगी !


राजयोग मेडिटेशन के द्वारा आत्मा के गुणों का विकासm


    हमारी आत्मा के सातों गुण..... शाँति, सुख,प्रेम,आंनद, शक्ति, ज्ञान, पवित्रता हैं, परन्तु परमात्मा इन गुणों का सागर है, वह सर्वशक्तिमान है, करन करावनहार है, और बड़ी बात....वह हम आत्माओं का पिता है, जब हम उसके साथ संबंध जोड़ कर उसकी याद में बैठते हैं तो सभी गुण स्वाभाविक रूप से हमारी आत्मा में भरने लगते हैं, उसके लिए हमें मांगने की आवश्यकता नहीं होती, जैसे कि सूर्य के सामने बैठने पर हमें उनसे धूप, प्रकाश और गर्मी मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ती, यह हमें स्वत: ही मिलने लगता है ! इसी को राजयोग मैडिटेशन कहते है।

आत्मा का परमात्मा से सहज मिलन - राजयोग


      अगर हम किसी को शांति सुख देंगे तो रिटर्न में हमें भी वही मिलेगा, विस्तार से जानने के लिए पढ़ें....

 निष्कर्ष 

       यही राज योग की शिक्षा है और यही जीवन की वास्तविकता भी है....हर धर्म ने भी हमें यही संदेश दिया है। जैसे कुदरत ने हमें सभी साधन एक से दिए हैं.....परमात्मा ने भी हमें यह सारे गुण,एक जैसे ही दिए हैं, तो क्यों ना हम सब एक दूसरे के साथ गुणों के आधार पर व्यवहार करें ।

     राजयोग का आधार ही है, स्व परिवर्तन। सर्वप्रथम स्वयं पर काम करके, स्वयं में परिवर्तन ला करके, विश्व परिवर्तन और विश्व कल्याण कर सकते हैं! राजयोग मेडिटेशन क्या है इसका दूसरा भाग आपको कैसा लगा आप कमेंट बॉक्स में अपने विचार शेयर कर सकते हैं। धन्यवाद 🙏😊✍️

 
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