ॐ शांति.... आज के अति व्यस्त और भागमभाग वाली जिंदगी में मनुष्य केवल अपने जीवन को बिता रहा है। उसके माइंड में विचारों का बवंडर चलता रहता है। अनेक विद्वानों और मनीषियों ने यह यह निष्कर्ष निकाला है कि मानव के मस्तिष्क में लगातार चलते विचार, सकारात्मक नहीं होते.. उनके अंदर केवल 10% विचार ही सार्थक होते हैं... बाकी 80% विचार निरर्थक, व्यर्थ, काल्पनिक और अनावश्यक होते हैं।और मजे की बात तो यह है कि हमें इन विचारों को लाने के लिए कोई प्रयास नहीं करना पड़ता.... यह स्वतः ही चलते रहते हैं.... लेकिन इनका चलना.. हमें मानसिक रूप से थका देता है... हमें अपने लक्ष्य से भटका देता है।
In this Article
मौन क्या है? क्या चुप रहना मौन है? हमारे ऋषि मुनि क्या कहते हैं? क्या सचमुच इसके बहुत फायदे हैं? अपनी जिंदगी में इसे शामिल कैसे करना है? क्या किसी प्रयोग के द्वारा हम इस का लाभ ले सकते हैं? इस लेख में, हम विस्तार से चर्चा करेंगे...
"हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……
स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।
यदि आप से कहा जाए कि आप अपने दिमाग में चलने वाले विचारों को कागज पर लिखिए तो आप तुरंत मना कर देंगे कि नहीं यह विचार अनावश्यक और अनचाहे हैं.... जिसका कोई महत्व नहीं है। आज मनुष्य का दिमाग चैटरबॉक्स बना हुआ है! और विडंबना यह है कि व्यर्थ के यह विचार मनुष्य बिना सोचे समझे सामने वाले पर बोल देता है.... नतीजा कार्य क्षेत्र में तनाव, परिवार में तनाव, रिश्तो में तनाव को झेलता है..इस तरह अधिक बोलकर स्वयं को मुश्किल में डाल कर वह केवल पछताता है !
हमारी भारतीय संस्कृति में अनेक विद्वानों, ऋषि-मुनियों ने मौन को अपने जीवन की महत्वपूर्ण कला बताया। मौन क्या है ?क्या मौन से हमें लाभ होते हैं ? और इसकी विधि क्या है ? बाहर के संसार में जो कुछ चल रहा है वह तो चल ही रहा है, लेकिन हमें अपने मन पर, अपनी बुद्धि पर, और अपने विचारों पर, ध्यान देना है। मौन द्वारा हम बाहरी जगत से आंतरिक जगत में प्रवेश करते हैं... आंतरिक जगत अथार्त अपने मन के अंदर।
मौन दो तरह का है, पहला - वाणी का मौन अथार्त चुप्पी और दूसरा है- मन का मौन। कहते हैं बुद्धिमान की पहचान ही है कि वह जरूरत पड़ने पर ही बोलता है, और ज्यादा सुनता है। लेकिन एक मूर्ख व्यक्ति ज्यादा बोलता है, और सुनता कम है।
मौन क्या है?
मन का मौन... जैसे नींद एक अवस्था है, जिससे हम ऊर्जावान हो जाते हैं, रिचार्ज हो जाते हैं.... उसी तरह 5 मिनट मौन की अवस्था हमें अद्भुत फल देती है। मौन वाणी का संयम है, अनुशासन है, एक साधना है, वाणी का तप है, जिसने मौन का मधुर संगीत सुन लिया है.... वह वाद विवाद की दुनिया से, व्यर्थ की बातों से, बड़बोले पन से, प्रदर्शन और पर चिंतन से, ईर्ष्या और द्वेष से परे हो जाता है !! कहा गया है..... "न बोलने के 9 गुण" जी हां !!
- मौन एक स्पेस(जग़ह) है, फीलिंग (भावों को अनुभव करना )और रिस्पांस (उत्तर देना ) के बीच जो समय है..वह मौन है।
- न बोलना मौन नहीं है, वरन बोलने की जो उत्कट इच्छा है, उससे मुक्त होना मौन है।
- मौन एक भाषा है, जो परमात्मा से जोड़ती है।
- मौन एक शक्ति है, जिसके द्वारा हम अपनी ऊर्जा का संचय कर पाते हैं।
- मौन शांति की एक कला है, जो हमारे जीवन को अद्भुत और शानदार बनाती है।
- मौन आत्मचिंतन, स्व दर्शन है।
- मौन चिंतन का सारांश है।
- मौन आत्मा की उन्नति और उसकी शुद्धि का मार्ग है।
गांधीजी मौन व्रत रखते थे, जिससे उनकी इच्छाशक्ति पूरी ब्रिटिश पावर को जड़ से उखाड़ने में लग गयी।
बल्लभ भाई पटेल भी मौन व्रत करते थे, जो लौह पुरुष के नाम से जाने जाते हैं।
लोग मौन को मेडिटेशन का नाम दे देते हैं, जो सही नहीं है। मेडिटेशन के कई चरण कहे गए हैं.... और इसका पहला चरण हम मौन को कह सकते हैं। सादगुरु ने कहा है कि मौन की शक्ति तभी आती है.... जब आप स्वयं को महत्व नहीं देते लेकिन जब आपको यह एहसास होता है कि आप स्मार्ट हो, बुद्धिमान हो, सब कुछ जानते हो, कुछ सीखने की जरूरत नहीं है, तब आप मौन नहीं रह सकते। लेकिन जिस पल आपको यह लगता है कि जीवन के संदर्भ में आपको अपने विचारों की कोई कीमत नहीं है... यह सब कोरी बकवास है... तो आप उन विचारों को हटा देते हैं... मौन में जाने की कोशिश कर सकते हैं।
मौन अथार्त शांत मन.... आपने देखा होगा जिसका मन शांत है... उसका चेहरा तेजस्वी और ओजस्वी है.. .उसकी वाणी में क्रांति है... उसके थोड़े से बोल मौन के कारण शक्तिशाली और तेजपूर्ण हैं ! उनका व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है।
मौन में जाकर आप रिचार्ज हो जाते हो, शांत हो जाते हो .. यह आपके जीवन को पूरी तरह से बदल देता है... अब आपको यह नहीं कहा जा रहा, कि आप ना बोले या मौन व्रत धारण करें। आप केवल अपनी दिनचर्या में 5 से 10 मिनट का मौन रखकर के इसे अपने जीवन का हिस्सा बना सकते हैं !!
सरल सा प्रयोग
मौन के प्रयोग के लिए सबसे पहले हमें अपने मन में इसको करने का एक दृढ़ संकल्प लेना है। हमारा दिमाग 50 चीजों पर भटक रहा है !! इसे पहले एक चीज पर लाना है ! कई लोग इसे 7चक्रों के माध्यम से भी करते हैं।
प्रयोग के लिए किसी शांत जगह का चुनाव करें.... केवल 5 मिनट का अभ्यास है यह.. आराम से बैठे...
- पहले मिनट.. अपने मन को इधर-उधर की विचारों से हटा करके, दूर से आती हुए आवाजों पर केंद्रित करें.. जैसे कार के हॉर्न की आवाज, चिड़ियों की चहचहाहट।
- दूसरे मिनट... अपने आसपास की आवाज पर ध्यान केंद्रित करें.. जैसे पंखे की आवाज.... ए.सी की आवाज, किसी के बात करने की आवाज।
- तीसरे मिनट.. अपने शरीर पर अपना ध्यान केंद्रित करें...मन की आँखों से अपने शरीर के सभी अंगों पर ध्यान लाएं ... देखें कि किस तरह मन को साधते ही शरीर भी सध जाता है !
- चौथे मिनट ...अपने मन पर जाएं और सबसे सरल आवाज अपनी सांसों की आवाज पर ध्यान केंद्रित करें।
- पांचवें मिनट.. अपने दिल की धड़कन को सुनने का प्रयास करें।
5 मिनट के इस अभ्यास द्वारा आप यह अनुभव करेंगें कि आपकी एकाग्रता बढ़ गई है.. 10 और 15 दिन के प्रयोग के बाद इसी तरह बैठ कर के आपको कुछ नहीं करना है....आपके अंतर में होगी.... केवल गहरी शांति !!धीरे धीरे आप देखेंगे कि मौन किस तरह आपकी रोजमर्रा की जिंदगी में समा गया है..दैनिक कार्य में, व्यवहार में, बोलचाल में, संबंधों में आप शांति और ख़ुशी महसूस करने लगेंगे !!
मौन के फायदे
मौन से इतने फायदे हैं, कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते, इससे शारीरिक फायदे तो हैं ही,मानसिक भी हैं..
- मौन High BP, Low BP (रक्तचाप )को संतुलित करता है।
- मौन इम्यूनिटी पावर को बढ़ाता है।
- बाहरी वातावरण के प्रदूषण और शोर से हमारे मस्तिष्क में तनाव उत्पन्न हो जाता है... मौन की साधना से यह तनाव स्वतः ही निकल जाता है।
- मौन से मानसिक संवेदनशीलता बढ़ती है।
- मौन हमारी निर्णय शक्ति को बढ़ाता है।
- मौन से हमारी कार्यक्षमता बढ़ती है।
- मौन द्वारा स्पष्ट दृष्टि रखने के कारण नजरिया बदलता है।
- मौन द्वारा हमारी रचनात्मकता बढ़ती है।
- जैसे हमारी वाणी का मौन बढ़ता है.. मन का मौन भी अंतर में समाता जाता है।
- मौन हमारी अध्यात्मिक स्थिति को शक्तिशाली बनाता है.. मौन की अवस्था में कोई योग और ध्यान करे.. तो वह निश्चय ही उच्च स्थिति को प्राप्त करता है।
- मौन हमारे दूरदृष्टि के गुण को बढ़ाता है, जिससे समस्या को सुलझाना आसान हो जाता है।
तो चलिए, स्वयं को देखें कि पिछले कुछ समय में हमारे द्वारा बोले गए शब्दों से क्या नुकसान हुऐ.. विचार करें... जो परिस्थितियां और घटनाएं आई... क्या उनमें मौन होकर के उनको टाला जा सकता था? इनका उत्तर आप अच्छे से समझ सकते हैं... हमें निरंतर सुदर्शन चक्र चलाना है.. अपने विचारों पर निगाह रखनी है.. अपनी वाणी को मौन द्वारा संयम में रखना है।
'मौन -अंतर की आवाज' यह लेख आपको कैसा लगा, आपके सुझावों का हमें हमेशा इंतजार रहता है। आप अपने सुझाव और अनुभव कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं। हमारी उड़ान का मकसद ही यही है कि स्वयं में परिवर्तन करके अपने जीवन को खुशहाल और शानदार बनाया जाए।
धन्यवाद 🙏😊✍️
0 टिप्पणियाँ