ओम शांति.... समाज के हर एक कोने में कोई ना कोई ऐसा जरूर मिल जाएगा, जो आप से भगवान और उसके अस्तित्व की बात करेगा.. लेकिन वह भी कंफ्यूजन में रहकर .भगवान के बारे में आज अलग-अलग मत मतान्तर हैं.... यथार्थ परिचय किसी के पास भी नहीं है.... एक तरफ हम कहते हैं कि परमात्मा एक है, हम सब एक हैं, सबका मालिक एक है। कोई भगवान को कण-कण में कहता... कोई कहता प्रकृति ही भगवान है.... कोई कहता, हम सबके अंदर भगवान हैं... इतनी ज्यादा भ्रम की स्थिति क्यों है? जिसको भी हमने देखा, उसी को भगवान कह दिया? क्या यह सत्य है? या फिर सत्य कुछ और है?
परमात्मा किसे कहेँगे 5 मुख्य बातें
बचपन में हमें यह सिखाया गया... देवी देवता हमारे भगवान हैं... उन को खुश करने के लिए, प्रार्थना करने के लिए, पूजा अर्चना, मंत्रोचार, ध्यान आदि की शिक्षा सभी को दी जाती है, तभी सभी के मन में यह बात आना स्वाभाविक है कि भगवान बहुत सारे हैं क्या? यह सब हमारे मुश्किलों को हल करेंगे?? यह फिर कोई और है जिन्हें परमात्मा कहा जा सके?
जैसे जौहरी के पास एक कसौटी होती है जिस पर कसकर वह सोने को परखता और गढ़ता है... ठीक वैसे ही हम कुछ मान्यताओं की कसौटी पर भगवान को कस कर देखेंगें.... कि कल अगर भगवान हमारे सामने आ जाए तो हम उसे पहचान सके 😊 ताकि बाद में पछताना न पड़े !! जी हां.. आज हम आपको भगवान को परखने की कसौटी दे रहे हैं.... जो 5 मुख्य बातों पर आधारित है:--
- भगवान वह हो सकता है, जो सर्व धर्म मान्य हो..जिसको सभी धर्म वाले, परमात्मा स्वीकार करें... उसको हम सत्य कहेंगे... जैसे एक व्यक्ति को कोई भाई कहता है, कोई मामा कहता है, कोई पिता कहता है, लेकिन उसका स्वरूप तो एक ही रहता है... उसी प्रकार चाहे ईश्वर कहो, अल्लाह कहो, खुदा कहो, जीसस कहो....लेकिन उसका स्वरूप तो नहीं बदलेगा। यही सत्य है !!
- परमात्मा वह है... जो सर्वोच्च हो, जिसके ऊपर कोई ना हो, उसका ना कोई माता पिता हो, ना बंधु हो, ना सखा हो, ना शिक्षक हो, उसे कहेंगे परमात्मा !!
- परमात्मा उसे कहा जाएगा जो सर्वोपरि हो, जिसका जन्म मरण के चक्र से कोई नाता ना हो, परमात्मा को अजन्मा कहते हैं, अजन्मा के साथ-साथ यह भी कहा जाता है कि उसे काल कभी नहीं खा सकता !!
- परमात्मा उसे कहेंगे, जो सर्वज्ञ हो, जिसको तीनों लोकों और तीनों कालों का ज्ञान हो, जो त्रिकालदर्शी हो !!
- परमात्मा उसे कहेंगे, जो सर्व गुणों में अनंत हो, जिस की महिमा के लिए कहते हैं :-धरती को कागज बनाओ, समंदर को स्याही बनाओ, और जंगल को कलम बनाओ, तब भी उसकी महिमा लिखी ना जा सके !!
तो यह है.. परमात्मा को परखने की वास्तविक पांच कसौटी... जिस कसौटी पर हमें अपनी मान्यताओं को कसकर देखना है कि क्या सत्य है? अगले लेख में हम इन कसौटीयों की विस्तार से चर्चा कर रहे हैं ... परमात्मा ज्योति बिंदु 2
परमात्मा का सत्य परिचय
सारांश यह है कि परमात्मा को सभी ने ज्योति बिंदु रूप में याद किया है... जो सर्वशक्तिमान हैं, दया के सागर, प्रेम के सागर, शांति के सागर हैं। परमपिता परमात्मा जो सर्व धर्म मान्य हैं, सर्वोच्च है, गुणों में सिंधु है, ऐसे परमपिता परमात्मा ज्योति बिंदु स्वरूप शिव ही वास्तव में हमारे पिता है, जिनसे संपूर्ण विश्व चलाएमान है, जो संपूर्ण सृष्टि के आदि, मध्य और अंत को जानने वाले हैं !!
निष्कर्ष
यदि आप भी परमात्मा को ढूंढ रहे हैं? साथ ही मन की शांति और संतुष्टि भी चाहते हैं !! तो परमात्मा की खोज में मेरे साथ बने रहिए... आगे आने वाले 2 लेखों में हमारी चर्चा के विषय होंगे... क्या परमात्मा है? परमात्मा कौन है? वह क्या है? उसका आकार क्या है? उसके गुण क्या है? परमात्मा को मानने की जो कसौटी हमने ऊपर बताई है क्या उस पर परमात्मा खरे उतरते हैं? परमात्मा के विषय में शास्त्रों में बताए गए बहुत सारे वाक्यांश समाज में फैले हुए हैं क्या वे परमात्मा के विषय में सही है? क्या हमें उन सब के विषय में और भी सोचना चाहिए.. क्या पुरानी मान्यताओं और अंधविश्वासों को जैसे के तैसे अपना लेना चाहिए.. या इन पर फिर से विचार करना चाहिए???
"प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू द्वारा प्रेरित"
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