कृतज्ञता का अभ्यास - 16वां दिन- हृदय का जादू

 


" एक मायने में मनुष्य ब्रह्मांड का संक्षिप्त रूप है इसलिए मनुष्य से ही ब्रह्मांड का सुराग मिल सकता है"

डेविड बाम  (क्वांटम भौतिक शास्त्री)

 ॐ शांति…. जी हां ! सौर तंत्र और ब्रह्मांड का नक्शा और हमारे शरीर का अंदरूनी हिस्सा एक समान है, जिस तरह ब्रह्मांड के ग्रह संतुलन और सामंजस्य में रहने के लिए सूर्य पर निर्भर हैं…. उसी तरह हमारी शारीरिक तंत्र का केंद्र और सूर्य हमारा हृदय है. हमारे शरीर के सारे अंग भी संतुलन और सामंजस्य बनाए रखने के लिए हृदय पर निर्भर रहते हैं !!


कृतज्ञता और आभार के विस्तृत अर्थ को समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं। कृतज्ञता अभ्यास की 21 दिन श्रंखला के अनगिनत लाभ पाने के लिए

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कृतज्ञता क्या है

कृतज्ञता प्रयोग के 21 दिन

In This Article

 कृतज्ञ भाव द्वारा मजबूत प्रतिरक्षा तंत्र
 कृतज्ञ भाव द्वारा हृदय की लय संतुलित

 ह्रदय की गहराई से कृतज्ञता महसूस करने का अभ्यास

 कृतज्ञता प्रयोग, 16वां दिन,ह्रदय का जादू, चार मुख्य बिंदु

 निष्कर्ष


कृतज्ञ भाव द्वारा मजबूत प्रतिरक्षा तंत्र


 कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने यह साबित कर दिया है कि ह्रदय में प्रेम,  कृतज्ञता और सराहना के भाव महसूस करने से हमारा प्रतिरोधक तंत्र मजबूत होता है, इससे महत्वपूर्ण रसायनों के उत्पादन में वृद्धि होती है,  जिससे शारीरिक बल और स्फुर्ती में वृद्धि होती है । प्रतिरोधक तंत्र के मजबूत होने से तनाव जनित हार्मोन के स्तर, हाई ब्लड प्रेशर,  चिंता, अपराध बोध, और थकान में कमी आती है, और डायबिटीज के रोगियों में ग्लूकोस का बेहतर नियंत्रण होता है।

 

कृतज्ञ भाव द्वारा हृदय की लय संतुलित

कृतज्ञता व प्रेम की भावनाओं से हमारे हृदय की लय बेहतर होती है.. हॉट मैथ के वैज्ञानिकों ने बताया कि हृदय का चुंबकीय क्षेत्र मस्तिष्क के चुंबकीय क्षेत्र से 5000 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है|और इसका दायरा हमारे शरीर में कई फुट दूर तक फैला होता है !

ह्रदय की गहराई से कृतज्ञता महसूस करने का अभ्यास

 

  किसी भी चीज के प्रति कृतज्ञ होने के लिए 'धन्यवाद' शब्द कहते और महसूस करते वक्त हम अपना दिमाग हृदय पर केंद्रित करते हैं..।  वैज्ञानिक शोध से यह स्पष्ट  हो चुका है कि कृतज्ञता महसूस करते समय और ह्रदय  पर ध्यान केंद्रित करने से हमारे प्रतिरक्षण तंत्र और स्वास्थ्य में व्यापक सुधार होता है | जब हम इसे पहली बार करते हैं, तो इसमें थोड़े अभ्यास की आवश्यकता होती है |


कृतज्ञ भाव द्वारा हृदय की लय संतुलित

        इस अभ्यास के लिए सबसे पहले अपने मन और ध्यान को ह्रदय के आसपास के क्षेत्र पर केंद्रित करें,  इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका ध्यान अपने शरीर के अंदर है या बाहर | आंखें बंद कर सकते हैं… सामान्यता आंखें बंद करने से हम अधिक कृतज्ञता को महसूस करते हैं…..आप अपना एक हाथ दिल के पास भी रख सकते हैं…. ताकि कृतज्ञता महसूस करते समय आपका दिमाग भी वहीं  केंद्रित रहे,  अभी कल्पना करें कि धन्यवाद के वह शब्द आपके दिमाग से नहीं….. दिल से आ रहे हैं !!

   यदि आप अपनी इच्छाएं को साकार करने की गति बढ़ाना चाहते हैं…. तो इच्छाऒं पर नियमित रूप से हृदय के जादू का अभ्यास जारी रखें,  इससे आपकी भावना की गहराई बहुत बढ़ जाएगी !!

    आपने अपने अंदर भावना की गहराई को बढ़ा लिया है इसके यह लक्षण हो सकते हैं कि आप अपने हृदय के आसपास सिहरन महसूस करें या शरीर में खुशी की लहर महसूस करें.. आपकी आंखों में आंसू भी आ सकते हैं…. लेकिन बिना किसी अपवाद के आप गहरी शांति और खुशी महसूस करने लगेंगे…. जिसे आपने पहले कभी भी महसूस नहीं किया |

ह्रदय की गहराई से कृतज्ञता महसूस करने का अभ्यास




आपको एक बार फिर से याद दिला दूं कि कृतज्ञता के इन प्रयोगों में केवल थोड़ी सी एकाग्रता और बहुत सारी कृतज्ञता की भावनाएं चाहिए, हर उस चीज के लिए, जो दिख रही है या नहीं दिख रही है, परंतु आपको सुख और खुशी देती हैं...
धन्यवाद🙏😊✍️


कृतज्ञता प्रयोग --16वां दिन- हृदय का जादू…डायरी पेन लेकर के बैठें , सुबह का कोई भी एक समय नियत कर सकते हैं….


1….सुबह सबसे पहले अपने जीवन की दस नियामतों की सूची बनाएं, जिनके लिए आप कृतज्ञ है।यह लिखें कि आप हर नियामत के लिए क्यों कृतज्ञ हैं ।

2… अपने मन और ध्यान को हृदय के आसपास के क्षेत्र पर केंद्रित करें अपनी कुछ मुख्य इच्छाओं की सूची लें, और हर इच्छा को पढ़कर के हृदय के जादू का अभ्यास करें।

 3…..अपनी सूची या तो मन ही मन या फिर जोर से पढ़ें,  जब आप अंत में पहुंचे तो जादुई शब्द धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद लिखें और उस नियामतों के लिए ज्यादा से ज्यादा कृतज्ञता महसूस  करें।

4….आज रात  सोने जाने से पहले अपना जादुई  पत्थर एक हाथ में थामें और दिन भर में  हुई सबसे अच्छी चीज के लिए जादुई  शब्द 'धन्यवाद'  कहें।

 निष्कर्ष

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