कृतज्ञता का अभ्यास -दसवाँ दिन -प्रकृति का आभार

 

 ओम शांति.... हमारा शरीर प्रकृति के पांच तत्वों से मिलकर बना है,यह है --जल, वायु,अग्नि,आकाश और पृथ्वी। तो इस तरह से हमारे शरीर में और प्रकृति में समानता है।  इसलिए इस पांचो  तत्वों के बिना मानव जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती।
   प्रकृति के खजाने अमूल्य रत्नों  से भरे हुए हैं, यह प्राकृतिक नियम है कि प्रकृति के खुले हुए खज़ानों में से आप अपनी क्षमता अनुसार अपने लिए निकाल सकते हैं।
लेकिन.. उसके लिए आपको प्रकृति के साथ सामंजस्य बैठाना होगा!

 इस लेख में....
  1.  कृतज्ञता और आभार क्या है
  2.  प्रकृति के कीमती उपहारों का हमारे जीवन में महत्व
  3.  कृतज्ञता के प्रयोग द्वारा प्रकृति को सहयोगी बनाना
  4.  अपना कुछ अमूल्य समय प्रकृति के साथ बिताए 
  5.  प्रकृति को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अपना योगदान दें 
  6.  हर उस चीज के लिए धन्यवाद जिसके बिना जीवन असंभव है
  7.  कृतज्ञता प्रयोग दसवां दिन प्रकृति
  8.  निष्कर्ष
"हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……
स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।
स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।

 कृतज्ञता और आभार क्या है 

''कृतज्ञता के अभ्यास के 21 दिन में हम यह समझ रहे हैं कि जीवन के हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है, ताकि छोटी से छोटी इच्छा और बड़े से बड़े सपने साकार हो जाएं। हमें अपने जीवन में जो कुछ मिला है उसके लिए ब्रह्मांड से, प्रकृति से, संसार की सर्वोच्च सत्ता से, देवी देवता से सदैव आभार और शुकराना करना है, जिसे हम कृतज्ञता कहते हैं। "कृतज्ञता का अभ्यास" एक सीरीज, कड़ी या श्रंखला है जो 21 दिन का प्रयोग है,ताकि हमारे अवचेतन मन में कृतज्ञता की भावना गहरे तक बैठ जाए | कृतज्ञता का अभ्यास और प्रयोग हमारी जिंदगी को खुशनुमा और शानदार बनाता है।

   कृतज्ञता का अभ्यास -नवां दिन -जीवनदायी हवा  इसमें हमने जाना….. सौर ग्रह की चीजें संयोगवश नहीं हो सकती, पृथ्वी और पृथ्वी के चारों ओर के हर छोटे छोटे तत्व का संतुलन और सामंजस्य हमारे जीवन को, और हमें कायम रखने के लिए किया गया है, वह हवा जिसमें हम सांस लेते हैं, वह प्रकृति का मज़ाक या संयोग नहीं है !

      जब मैंने पहले पहल कृतज्ञता की शक्ति का इस्तेमाल शुरू किया तो मैं इसका इस्तेमाल उन सब व्यक्तिगत और भौतिक चीजों के लिए करती थी,  जिन्हें मैं पाना चाहती थी... सुख सुविधाएं और इच्छापूर्ति के साधन…. और कृतज्ञता का यह तरीका कारगर साबित हुआ। लेकिन जब मैं जीवन के सच्चे उपहारों के लिए (प्रेम शांति ख़ुशी आंनद संतुष्टि ) कृतज्ञता महसूस करने लगी, तब मैंने कृतज्ञता की चरम शक्ति का अनुभव किया।

प्रकृति के कीमती उपहारों का हमारे जीवन में महत्व

  सूर्योदय, सूर्यास्त, वृक्ष, समुद्र, बगीचे की हरी भरी घास, घास पर गिरी हुई ओस की बूंदे, रंग बिरंगे फूल, उन पर उड़ती हुई रंग बिरंगी तितलियां और भंवरे, रिमझिम बरसात, आकाश में चमकते हुए इंद्रधनुष, सुबह की पहली धूप, अपने जीवन और आसपास के लोगों को लेकर मैं जितना अधिक कृतज्ञ हुई…. मेरे सपनों की हर भौतिक चीज उतनी ही तेजी से मेरी झोली में आ गिरी.. मैं अब समझती हूं कि ऐसा क्यों हुआ???

कृतज्ञता के प्रयोग द्वारा प्रकृति को सहयोगी बनाना

       जब हम जीवन और प्रकृति के कीमती उपहारों के लिए सचमुच कृतज्ञता महसूस करते हैं, तो हम उस गहरे स्तर पर पहुंच जाते हैं, जहां हमें पूर्ण समृद्धि मिलना तय है..

    हमारे भारतवर्ष में प्रकृति कई रूप बदलती है... हर ऋतु में प्रकृति नए तरीके से शृंगारित होती है!!

अपना कुछ अमूल्य समय प्रकृति के साथ बिताए

अपना कुछ अमूल्य समय प्रकृति के साथ बिताए 

     आकर्षण का नियम, प्रकृति के छोटे से छोटी और बड़ी से बड़ी चीज में सक्रिय है.. फूल मधुमक्खियों को आकर्षित करता है,  बीज मिट्टी के पोषक पदार्थों को आकर्षित करता है,  आकर्षण की शक्ति,  पृथ्वी के सभी जीव जंतुओं,  समुद्र की सभी मछलियों और आकाश के सभी पक्षियों में सक्रिय रहती है !!

    तो चलिए एक बार फिर से अपनी समस्याओं और परिस्थितियों को भूल कर बच्चे बन जाएँ, और उस बचपन  को याद करें...... जब पार्क में जाते ही हम ख़ुश हो जाया करते थे, हरी घास पर खेलते, रंग बिरंगी तितलियों  के पीछे भागते कितना वक़्त  बिता दिया करते थे, प्रकृति का ये आनंद हमने तब तक लिया, जब तक हम बड़े नहीं हो गए !!

        निराश ना हों... 😊हम आज भी प्रकृति  का निश्छल और पक्षपात रहित प्रेम पा सकते हैं …. इसके लिए हमें अपना फुरसत का कुछ कीमती समय प्रकृति के साथ गुजरना होगा !😊

     तो प्रकृति में अपनी प्रिय चीजों की तलाश करें…जैसे ..पक्षी, पेड़, फूल, सुगंध नदी, समुद्र, वर्षा, पहाड़ और प्रकृति के रंग | जब आप प्रकृति से प्रेम करते हैं, आप प्रकृति से एक अनजाना रिश्ता जोड़ लेते हैं| प्रकृति के साथ कुछ समय बिता कर आप स्वयं के अंदर सीमित ऊर्जा, रोमांच, जीवन के प्रति अनंत जोश को महसूस करने लगेंगे ! प्रकृति आपकी सहयोगी बनने  लगेगी  !

प्रकृति को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अपना योगदान दें 

इसके साथ ही हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि प्रकृति प्रदूषित ना हो, क्योंकि प्रदूषण मुक्त प्रकृति द्वारा ही हमारी पृथ्वी सुरक्षित है.... ये हम सब की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है।

प्रकृति को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अपना योगदान दें

    

प्रकृति को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अपना योगदान दें

हर उस चीज के लिए धन्यवाद, जिसके बिना जीवन असंभव है

      सूर्य चंद्र और तारों के लिए धन्यवाद दें, पानी के लिए जो पीते हैं, भोजन के लिए जिसे आप खाते हैं, हवा के लिए जिससे आप सांस लेते हैं। 

       पेड़ों, जानवरों, महासागरों, पक्षियों, फूलों, पौधों, आसमान, बारिश, तारे, हमारी सुंदर धरती के लिए आभार प्रकट करें….. प्रकृति के साथ फुर्सत का हर पल कृतज्ञ होने और अपनी चीजों को कई गुना करने का अवसर है |

कृतज्ञता प्रयोग --दसवां दिन-प्रकृति..... डायरी पेन लेकर के बैठें , सुबह का कोई भी एक समय नियत कर सकते हैं….

1….सुबह सबसे पहले अपने जीवन की दस नियामतों की सूची बनाएं,  जिनके लिए आप कृतज्ञ है।यह लिखे कि आप हर नियामत के लिए क्यों कृतज्ञ है।

2…प्रकृति के सानिध्य में  कुछ समय बिताएं और विचार करें कि प्रकृति ने अपने प्रेम स्वरूप हमें क्या क्या नेमतें दी हैं... उनका दिल से शुक्रिया करें।

3…..अपनी सूची या तो मन ही मन या फिर जोर से पढ़ें,  जब आप अंत में पहुंचे तो जादुई शब्द धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद लिखें और उस नियामतों के लिए ज्यादा से ज्यादा कृतज्ञता महसूस  करें।

4….आज रात  सोने जाने से पहले अपना जादुई  पत्थर एक हाथ में थामें और दिन भर में  हुई सबसे अच्छी चीज के लिए जादुई  शब्द 'धन्यवाद' कहें।

 निष्कर्ष

 कृतज्ञता अभ्यास, दसवां दिन, प्रकृति' आपको कैसा लगा। यदि आपको भी लगता है, हम प्रकृति के कर्जदार हैं, तो आप हमें कमेंट बॉक्स में अपने विचार शेयर कर सकते हैं। धन्यवाद 😊🙏✍️

प्राकृतिक सौंदर्य




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