ॐ शांति कृतज्ञता के अभ्यास के 9वें दिन हम बात करेंगे जीवनदाई हवा की, जिसमें आप और हम सांस लेते हैं।
In This Article.....
- आभार और कृतज्ञता क्या है
- क्या हवा के लिए भी कृतज्ञ होना चाहिए?
- प्रकृति की अनमोल व्यवस्था और संतुलन
- हवा जल सौर ग्रह नक्षत्र आकाशगंगा के लिए कृतज्ञ भाव
- कृतज्ञता अभ्यास, नवा दिन, जीवनदाई हवा,चार मुख्य बिंदु,
- निष्कर्ष
आभार और कृतज्ञता क्या है
क्या हवा के लिए भी कृतज्ञ होना चाहिए?
यदि कुछ साल पहले मुझसे कहा गया होता कि मैं जिस हवा में सांस लेती हूँ, उसके लिए मुझे कृतज्ञ होना चाहिए तो मैं यही सोचती… इनका दिमाग खराब हो गया है, ये क्या बात हुई? सांस लेने के लिए इस हवा का क्या कृतज्ञ होना ??
तो जब कृतज्ञता का इस्तेमाल करने पर मेरी जिंदगी बदली…. अनदेखी करने वाली चीजों पर मैं ध्यान देने लगी.. तो चमत्कार हो गया…पहले जीवन के प्रतिदिन में छोटी छोटी बातों पर चिंता करना, विचारों के जाल में फंसे रहना... केवल यही काम थे, परंतु जैसे जैसे जीवन के नियम समझ आने लगे, तो मैं बड़ी तस्वीर और सृष्टि के आश्चर्य के बारे में सोचने लगी!!!
प्रकृति की अनमोल व्यवस्था और संतुलन
महान वैज्ञानिक न्यूटन ने कहा है,"सौर तंत्र को देखने पर मैं पाता हूं कि पृथ्वी, गर्मी और प्रकाश की सही मात्रा पाने के लिए सूर्य से सही दूरी पर है, यह संयोगवश नहीं हुआ है।
उनके इस विचार से यह समझ आया...
- यह कोई संयोग नहीं है कि एक रक्षात्मक वातावरण हमें घेरे हुए हैं,और उसके परे कोई हवा, ऑक्सीजन नहीं है!!
- यह कोई संयोग नहीं है कि पेड़ ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, यह तो सृष्टि की व्यवस्था है कि हमारे वातावरण में ऑक्सीजन की आपूर्ति लगातार होती रहे।
- यह कोई संयोग नहीं है कि हमारा सौर तंत्र आदर्श ढंग से बना हुआ है!यदि हम आकाशगंगा में किसी दूसरे स्थान पर होते, तो हम संभवत कॉस्मिक रेडिएशन से नष्ट हो चुके होते!!
हजारों मानदंड और अनुपात पृथ्वी पर जीवन का समर्थन करते हैं, आपस में जुड़े हुए हैं, इनमें से किसी में जरा सा भी परिवर्तन पृथ्वी नामक ग्रह पर जीवन को असंभव बना देगा !! यह सब चीजें सहयोग से नहीं बनी है, सारी चीजें आदर्श तरीके से और तरतीब से बनाई गई हैं, आदर्श ढंग से संतुलित हैं, और वे सब हमारे लिए हैं।
आपको यह एहसास हो जाता है यह सारी चीजें और उनका संतुलन केवल हमारे जीवन के लिए है, तो आप जीवन के लिए कृतज्ञता का जबरदस्त एहसास महसूस करेंगे।
हवा जल सौर ग्रह नक्षत्र आकाशगंगा के लिए कृतज्ञ भाव
हमारे सांस लेने के लिए सृष्टि ने हवा उत्पन्न करने के लिए इतनी विराट व्यवस्था की है, ऑक्सीजन हमारे शरीर के सबसे प्रचुर तत्वों में से एक है…. जब हम सांस लेते हैं, तो यह हमारे शरीर की हर कोशिका को पोषण देती है, ताकि हम जिंदा रह सके..... हवा हमारे जीवन का सबसे कीमती उपहार है क्योंकि इसके बिना हम में से कोई भी चंद मिनटों से अधिक जीवित नहीं रह सकता | अधिक विस्तार में ना जा करके मैं अपना अभ्यास बताती हूँ.. मैं अपनी बालकनी में खड़ी होकर के उस हवा के प्रति कृतज्ञ होती हूं जो मेरे चारों ओर है....... साफ, स्वच्छ, स्फूर्ति दायक, प्रदूषण मुक्त और सुगंधित….
आज जरा ठहरें और उस सुखद हवा के बारे में सोचें, जिसमें आप सांस लेते हैं, चेतन होकर पांच पांच बार सांस ले, शरीर के भीतर हवा के प्रवाहित होने की भावना महसूस करें, फिर सांस बाहर निकालने के आनंद को अनुभव करें, यह काम पांच अलग-अलग समय पर करें, और जब आप पांच बार सांसे लेकर छोड़े, तो कहें…. "इस जादुई हवा के लिए धन्यवाद जिसमें मैं सांस लेता हूं /लेती हूं"….. इस कीमती जीवनदाई हवा के लिए सचमुच अधिकतम कृतज्ञ बने…. महत्वपूर्ण बात यह है कि आप हवा के शरीर के भीतर जाने और बाहर निकलने की भावना को पूरी तरह चेतन होकर महसूस करें । आप इस अभ्यास को खुले में करें…. ताकि ताजी हवा की भव्यता को सचमुच महसूस कर सके, और उसकी कद्र कर सके, यदि यह संभव ना हो तो घर के भीतर ही करें।
प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है… जब कोई व्यक्ति हवा के लिए गहराई से कृतज्ञ होने की सीमा तक पहुंच जाता है, जिसमें वह सांस लेता है तो उसकी कृतज्ञता, शक्ति के एक नए स्तर पर पहुंच जाती है।
कृतज्ञता प्रयोग -- नवां दिन -जीवनदायी तत्त्व -डायरी पेन लेकर के बैठें , सुबह का कोई भी एक समय नियत कर सकते हैं….
1….सुबह सबसे पहले अपने जीवन की दस नियामतों की सूची बनाएं जिनके लिए आप कृतज्ञ है | यह लिखें, कि आप हर नियामत के लिए क्यों कृतज्ञ है।
2.... जीवनदाई हवा के बारे में सोचें, जिसमें आप सांस लेते हैं, पूरी तरह चेतन होकर 5 बार सांस लें और छोड़े और हवा के अपने शरीर में प्रवाहित होने की भावना महसूस करें..... उसके लिए मन ही मन या जोर से धन्यवाद कहें।
3…..अपनी सूची या तो मन ही मन या फिर जोर से पढ़ें, जब आप अंत में पहुंचे तो जादुई शब्द धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद लिखें और उस नियामतों के लिए ज्यादा से ज्यादा कृतज्ञता महसूस करें।
4….आज रात सोने जाने से पहले अपना जादुई पत्थर एक हाथ में थामें और दिन भर में हुई सबसे अच्छी चीज के लिए जादुई शब्द 'धन्यवाद' कहें।
निष्कर्ष
"कृतज्ञता अभ्यास का नवा दिन,जीवनदायिनी हवा" यह लेख आपको कैसा लगा? यदि आपको लगता है कि हमें हवा के प्रति भी कृतज्ञ होना चाहिए तो आप मुझे कमेंट बॉक्स में अपने विचार अवश्य ही शेयर करें ।
धन्यवाद🙏😊✍️
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