कृतज्ञता का अभ्यास-आठवां दिन - जीवनदायक तत्वों का आभार

 रंग बिरंगी सब्जियां शरीर को पोषण देती है

   ॐ शांति. जीवन दायक तत्व... जो हमारे जीवन जीने के लिए अति आवश्यक है, आप समझ ही गए होंगे, जी हां... भोजन, पानी,  हवा.. इस आलेख में हम भोजन और पानी के विषय में बात करेंगे... दरअसल हमको जीने, सोचने और अच्छा महसूस करने के लिए भोजन और पानी की आवश्यकता होती है |आप यह सोचें..... जब कुछ घंटे आपने खाना या पानी नहीं लिया था तो आप की क्या स्थिति थी????  आप सामान्य ढंग से सोच नहीं पा रहे थे.... ठीकसे काम नहीं कर पा रहे थे..... कमजोरी महसूस हो रही थी.... आपका दिमाग दुविधा में पड़ गया था और आपकी भावनाएं रसातल को छूने लगी थी🥱

 इस लेख में.....


  •  कृतज्ञता क्या है
  •  प्रकृति द्वारा दिए गए  जीवनदाई तत्व
  •  जल और भोजन का उपयोग करते समय कुछ नियम
  •  कृतज्ञता द्वारा इन जीवन तत्वों को शक्तिशाली बनाना
  •  कृतज्ञता प्रयोग आठवां दिन चार मुख्य बिंदु
  •  निष्कर्ष

"हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……

स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।

स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।

 कृतज्ञता क्या है

''कृतज्ञता के अभ्यास के 21 दिन में हम यह समझ रहे हैं कि जीवन के हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है, ताकि छोटी से छोटी इच्छा और बड़े से बड़े सपने साकार हो जाएं। हमें अपने जीवन में जो कुछ मिला है उसके लिए ब्रह्मांड से, प्रकृति से, संसार की सर्वोच्च सत्ता से, देवी देवता से सदैव आभार और शुकराना करना है, जिसे हम कृतज्ञता कहते हैं। "कृतज्ञता का अभ्यास" एक सीरीज, कड़ी या श्रंखला है, जो 21 दिन का प्रयोग है,ताकि हमारे अवचेतन मन में कृतज्ञता की भावना गहरे तक बैठ जाए | कृतज्ञता का अभ्यास और प्रयोग हमारी जिंदगी को खुशनुमा और शानदार बनाता है।

आपको एक बार फिर से याद दिला दूं कि इस प्रयोग में केवल थोड़ी सी एकाग्रता चाहिए और बहुत सारी कृतज्ञता की भावनाएं चाहिए... हर उस चीज के लिए, जो दिख रही है या नहीं दिख रही है, परंतु आपको सुख और खुशी देती हैं |😊

प्रकृति द्वारा दिए गए जीवनदाई तत्व

       भोजन एक उपहार है,  यह प्रकृति का उपहार है... क्योंकि यदि प्रकृति,भोजन उगाने के लिए हमें मिट्टी, पोषक पदार्थ और पानी उपलब्ध न कराए...... तो हम में से किसी के पास भी खाने के लिए कुछ ना रहे… पानी के बिना कोई भोजन,  वनस्पति,  पशु या मानव जीवन संभव नहीं है....... हम अपना भोजन पकाते समय, खाते समय, बगीचे की देखभाल करते समय,  पानी का इस्तेमाल करते हैं,  हर वाहन में, अस्पतालों में,  ईंधन, खनन, उद्योगों, कल कारखाने,  कपड़े और संसार के हर उपभोक्ता,  उत्पाद और उपकरण बनाने में,  जीवनदायिनी दवा बनाने में, हमारी इस जीवन के मकान और इमारत बनाने में पानी का इस्तेमाल करते हैं|पानी हमारे शरीर को जीवित रखता है |

           "इस पृथ्वी पर कोई जादू है तो यह पानी में निहित है"  लॉरेन ऐस्ली 

जल ही जीवन है

जल और भोजन का उपयोग करते समय कुछ नियम

  
 भोजन और पानी के बिना हमारा क्या होगा??? हम इस संसार में रह ही नहीं पाएंगे !!कोई मित्र परिजन भी नहीं रह पाएगा !!लेकिन हम इस सुंदर ग्रह पर एक साथ रह रहे हैं,  जीवन को इसकी चुनौतियों, आनंद दाई पलों के साथ जी रहे हैं कि हमें प्रकृति ने भोजन और पानी का उपहार दिया है |इसलिए कुछ भी खाने पीने से पहले, जादुई  शब्द धन्यवाद कहना और पानी के चमत्कार को पहचानने और कृतज्ञ होने का कार्य है.... हमारी इस कृतज्ञता से उन लोगों को मदद मिलेगी:--जो दम तोड़ रहे हैं.... बहुत अधिक जरूरतमंद है !!!!भोजन के प्रति कृतज्ञता हमारी हर प्रिय चीज में अपना सुखद सुनहरा धागा पिरो देगी जिससे आप प्रेम करते हैं और जिसके आप सपने देख रहे हैं |

    भोजन करने से पहले धन्यवाद देना एक ऐसी परंपरा है..... जो हजारों वर्षों से चली आ रही है बच्चों को भी यह सिखाया जाता है,  कि भोजन करने से पहले हाथ जोड़कर प्रार्थना करें.... भारतीय संस्कृति तो यही कहती है.... परंतु 21वीं सदी की तेज रफ्तार जिंदगी मे हम भोजन के लिए धन्यवाद देने का समय नहीं निकाल पाते |लेकिन खाने-पीने जैसे आसान काम का इस्तेमाल.. अगर आप कृतज्ञ होने के अवसर के रूप में करते हैं.... तो इससे आपके जीवन में परिवर्तन सुनिश्चित है|

कृतज्ञता द्वारा इन जीवन तत्वों को शक्तिशाली बनाना

    पुराने जमाने के लोग यकीन करते थे कि जब वह अपने भोजन और पानी के लिए कृतज्ञतावश प्रार्थना करते थे तो इससे वह शुद्ध हो जाता था| वे सही कहते हैं क्योंकि क्वांटम फिजिक्स में प्रेक्षक प्रभाव बताता है कि अवलोकन की प्रक्रिया किसी भी  वस्तु में कई परिवर्तन कर देती है जिससे उसकी ऊर्जा और संरचना में परिवर्तन हो जाता है वह विशुद्ध हो जाते हैं और इसतरह  हमारे द्वारा खाई जाने वाली हर चीज सारे शरीर को सर्वश्रेष्ठ लाभ पहुंचाएगी |

जैसा अन्न वैसा मन

    तो आज कुछ भी खाने पीने से पहले, चाहे आप भोजन करें,  फल खाएं या नाश्ता करें या कोई चीज पिए,  जिसमें पानी भी शामिल है..... एक पल निकाल कर उस चीज को देखें, जिसे आप खाने पीने वाले हैं,  मन ही मन या जोर से जादुई शब्द 'धन्यवाद' कहें, और सचमुच उसका स्वाद लें,  क्योंकि जब आप स्वाद पर ध्यान केंद्रित करते हैं.... तो यह एकाग्रता और कृतज्ञता जो आपकी ऊर्जा  हैं.. स्वाद को तत्काल बढ़ा देती हैं !!!

 जीवन में भोजन और पानी, ऐसी छोटी छोटी चीजों के लिए कृतज्ञ होना,  कृतज्ञता की गहनतम अभिव्यक्तियों में से एक है..😊🙏✍️

कृतज्ञता प्रयोग -- आठवां दिन -जीवनदायी तत्त्व -डायरी पेन लेकर के बैठें , सुबह का कोई भी एक समय नियत कर सकते हैं….

1….सुबह सबसे पहले अपने जीवन की दस नियामतों की सूची बनाएं जिनके लिए आप कृतज्ञ है | यह लिखें, कि आप हर नियामत के लिए क्यों कृतज्ञ है |

2....कुछ भी खाने, पानी पीने से पहले एक पल का समय निकाल कर देखें कि आप क्या खाने जा रहे हैं उसके लिए मन ही मन या जोर से धन्यवाद कहें |

3…..अपनी सूची या तो मन ही मन या फिर जोर से पढ़ें,  जब आप अंत में पहुंचे तो जादुई शब्द धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद लिखें और उस नियामतों के लिए ज्यादा से ज्यादा कृतज्ञता महसूस  करें |

4….आज रात  सोने जाने से पहले अपना जादुई  पत्थर एक हाथ में थामें और दिन भर में  हुई सबसे अच्छी चीज के लिए जादुई  शब्द 'धन्यवाद'  कहें |

निष्कर्ष

कृतज्ञता अभ्यास सीरीज के आठवें दिन हमने जीवनदायी तत्व जैसे कि भोजन,जल, आदि को दिल से धन्यवाद दिया।

मैं समय समय पर इनको करती रहती हूँ। भगामभाग जिंदगी में हम कुछ जरूरी चीजें भूल जाते हैं... समय समय पर करते रहने से यह हमारे जीवन का अंग बन जातीं हैं। इस तरह कृतज्ञता के अभ्यासों द्वारा मैं अपने को भरपूर करती हूँ ...मुझे अपने जीवन में किसी तरह की कमी महसूस नहीं होती । इस मंच पर मैं आपसे अपने अनुभव शेयर करती हूँ कुछ चिंतन योग्य..ताकि आप भी उनका लाभ लें सकें।

यह आलेख आपको कैसा लगा? आप कमेंट बॉक्स में कमेंट अवश्य करें। कृतज्ञता अभ्यास के 21 दिन तक आप हमारे साथ जुड़े रहे और अपने जीवन को शानदार और खुशनुमा बनाए।

धन्यवाद🙏😊✍️


अपने भोजन को शक्तिशाली बनाएं





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