कृतज्ञता 2/Gratitude 2

कृतज्ञता  2

 कृतज्ञता एक भाव है जो हृदय  से उपजता है।

  1. कृतज्ञता का अर्थ है ---आभार, शुकराना, धन्यवाद, अहसानमंद , श्रद्धासिक्त सम्मान
  2. कृतज्ञता इंसानियत की सर्वोत्कृष्ट विशेषता है !
  3. कृतज्ञता दिव्य प्रकाश है !
  4. कृतज्ञता देवीय गुण है !
  5. कृतज्ञता एक पावन यज्ञ है !
  6. कृतज्ञता एक महानता की शुरुआत है !
  7. कृतज्ञता विनम्रता की अभिव्यक्ति है !
  8. कृतज्ञता प्रार्थना, श्रद्धा, साहस ,संतोष, सुख ,प्रेम ,भलाई की आधारशिला है l
  9. कृतज्ञता एक व्यायाम भी है ,जो यह निर्देश देता है कि आपको कुछ चीजों के खोने की कल्पना करनी चाहिए, जिन्हें आप ने स्वीकारा है जैसे कि आपका घर ,नौकरी ,सुखसुविधायें ,संपत्ति वगैरह।
  10. कृतज्ञता आपको छोटी छोटी चीजों से और खुशियों से सुख भी देती है।


   सरल शब्दों में --कृतज्ञता हमें बताती है..... प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप में ,कभी भी,किसी ने कोई सहयोग और सहायता प्रदान की है, तो उसके लिए यदि कुछ ना कर सके तो हृदय से आभार अवश्य प्रकट करें।
  
    जो दिया है, हम उसके ऋणी है, इसकी अभिव्यक्ति  ही कृतज्ञता है! और अवसर आने पर उसे समुचित रूप में लौटा देना ही,  इस गुण का मूल मंत्र है।

      इस गुण के बल पर समाज और इंसान में एक सहज संबंध विकसित हो जाता है । भावना और संवेदना का सजल वातावरण विनिर्मित हो जाता है।
   
     कृतज्ञ व्यक्ति अपने ऋण को सम्मान और सहयोग के रूप में वापस लौटाता है ,अतःउसे दृश्य और अदृश्य रूप से दैवीय अनुदान और वरदान मिलते हैं। और कहा जाता है...जिन्हें देवीय वरदान मिलते हैं, उन्हीं का जीवन सार्थक होता है।

इसलिए लोगों को धन्यवाद कहना, अपनी आदत बना दे 

Johannes A Gaertner के शब्दों में

"कृतज्ञता के विषय में कहना सुसभ्य और सुखकर है , कृतज्ञता को व्यवस्थापित करना उदार और श्रेष्ठ है , लेकिन कृतज्ञता को अपने जीवन में उतारना स्वर्ग का स्पर्श करना है"🙏💥

परम सत्ता का धन्यवाद


कृतज्ञता  जीवन में खुशियां लाती है

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