ओम शांति...."बिन पानी सब सून"जी हाँ !! जल के बिना जीवन की कल्पना असंभव है। हमारा शरीर ही 70 परसेंट पानी से बना है। हमारे शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए भी पानी महत्वपूर्ण है. रोजमर्रा के कार्यों में पानी अहम भूमिका निभाता है.
खाना बनाने से लेकर के नहाने, धोने, घर को साफ रखने आदि सबके लिए पानी की आवश्यकता होती है। कृषि कार्य में, बिजली उत्पादन में, मकान सड़क आदि निर्माण कार्य में, पानी की आवश्यकता होती है, पेड़, पौधे, प्रकृति, जलवायु,फल फूल, पशु पक्षी, सब को पानी की आवश्यकता होती है। इतनी महत्वपूर्ण चीज 🤔!!जिसके कम होने और खोने मात्र की कल्पना से ही रोंगटे खड़े हो जाते है!! मन व्यथित हो जाता है!🥺
इस लेख में....
- जल की उपयोगिता... एक अटल सत्य
- चिंताजनक.... रसातल में पहुंच गया जल
- लॉकडाउन में बड़ी पानी की खपत
- पानी बचाइए वरना बढ़ेगी परेशानी
- पानी बचाने के लिए अपनानी होगी गांव की परंपर
- जलस्तर कम होने के कारण
- पानी की बर्बादी रोकने के, रोजमर्रा के उपाय
- सरकार द्वारा चलाए गए जल जागरूकता अभियान
- निष्कर्ष
चिंताजनक... रसातल में पहुंच गया जल
मनुष्य की जरूरतों की पूर्ति के लिए जिस तरह भूगर्भ जल का दोहन किया जा रहा है, इस से साल दर साल जल का स्तर गिरता जा रहा है! 10 साल पहले तक जहां 30 मीटर की खुदाई कर पानी मिल जाता था, आज वही 60 से 70 फीट की खुदाई करनी पड़ती है, तभी जल के दर्शन हो पाते हैं। उत्तर भारत में नदियों का जलस्तर भी लगातार रसातल में पहुंच रहा है।
हमारे भारतवर्ष के कई प्रदेश.... जैसे उत्तर प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, बिहार आदि कई जिलों में भूगर्भ जल का स्तर घट गया है, बिहार के 9 जिलों में पिछले साल की अपेक्षा इस साल 1 से 8 फुट तक पानी नीचे चला गया है, इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण नियत विभाग (पी एच ई डी) की चिंताएं बढ़ गई है।
इसी के साथ फरीदाबाद, गुरुग्राम, गाजियाबाद भी केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक गिरावट के लिहाज से रेड जोन में है। जिले के कई इलाकों में भूजल प्रति वर्ष 10 फुट से अधिक नीचे गिर रहा है।
आने वाले वर्षों में दुनिया भर में पानी की बड़ी किल्लत होने वाली है, करीब 120 ऐसे देश है, जहां पानी की हाय तौबा मचने वाली है।
इस साल संयुक्त राष्ट्र के "विश्व जल दिवस" का नारा 'पानी का महत्व' उसके लिए बेशक नया होगा.....लेकिन भारत में सदियों से पानी के महत्व को विभिन्न तरीकों से दर्शाया गया है। जब से पानी से पैसा जुड़ा है, तभी से दुनिया का एक खास वर्ग इसे मात्र वस्तु की तरह देखता है ।
पानी के प्रति शहरी आस्था, इसकी उपलब्धता और उपयोग से जुड़ी है, इसको ऐसे भी देखा जा सकता है कि आज दुनिया भर में करीब 10 लाख पानी की बोतल में बिकती है, दूसरी तरफ पानी के प्यूरीफायर का भी बड़ा बिजनेस है, आज पानी का अरबों डॉलर का वैश्विक कारोबार है।
लॉकडाउन में बढ़ी पानी की खपत
विश्व भर में कोरोनावायरस के चलते, लगाए गए लॉकडाउन के कारण घरेलू उपयोग के लिए जल की मांग बढ़ी है। एक सर्वे में पानी की दैनिक खपत में दोगुनी वृद्धि देखने को मिली। जिससे इसकी आशंका बढ़ी है कि अगले कुछ वर्षों में जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
पानी बचाइए वरना बढ़ेगी परेशानी
अभी कोई रहस्य छिपा नहीं रह गया है कि दुनिया भर में पानी की बड़ी किल्लत होने वाली है। करीब 120 ऐसे देश है....जहां पानी के लिए हाय तौबा मचने वाली है। अपने देश में भी करीब 21 शहरों को पानी का ज्यादा संकट देख़ना पड़ सकता है, क्योंकि इनका भूजल स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है । वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट के अनुसार साल 2050 सब दुनिया में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता कम हो जाएगी। ऐसे में, अगर पानी को बचाना है और यदि आप आने वाले भविष्य को जीवन प्रदान करना चाहते हैं... तो इसके संरक्षण की ओर ध्यान केंद्रित करना ही होगा।
पानी बचाने के लिए अपनानी होगी गांव की परंपरा
'पानी पर नैतिकता' अब कहीं दिखाई नहीं देती....सिवाय गांव के....यह गांव ही है, जहां पानी मात्र पनपता नहीं, बल्कि पूजा भी जाता है! यही कारण है कि वहां पानी की परंपराएं भी है! और पानी को प्रकृति के प्रसाद के रूप में देखा जाता है! जल के देवता को "वरुण देव" कहा जाता है।
आज जब पानी को नए सिरे से पूजा नहीं जाएगा, तब तक पानी का महत्व हम नहीं समझ पाएंगे। संयुक्त राष्ट्र की भी यही चिंता है कि पानी को लोगों की आस्था और आत्मा से कैसे जुड़ा जाए? ताकि इसे बचाने में सबकी भागीदारी संभव हो सके।
जलस्तर कम होने के कारण
पानी को बचाने के लिए हमें सबसे पहले इस के विज्ञान को समझना होगा। यह तो स्पष्ट है कि धरती और वर्षा ही पानी का प्रबंधन करते हैं। हिमालय के ग्लेशियर से लेकर देश के तालाबों, नदियों तक इन दोनों के प्राकृतिक प्रबंधन का ही परिणाम है। वर्षा का पानी,वनो को सीँचकर तालाब और कुएं को तर करते हैं। परंतु जहां पर वनों का अभाव है...वहां धरती की मिट्टी अपनी क्षमता के अनुसार जलभिदों को सींचती है। मगर सच तो यह भी है कि इस प्रबंधन पर मनुष्य से ही हमेशा चोट पहुंची है। अंधाधुन पेड़ों की कटाई, शहरों का विस्तारीकरण, वनों का अभाव, आदि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ निश्चय ही मनुष्यों को ही भारी पड़ती है।
जैसे वनों के कटे हुए क्षेत्रफल जिनके कारण जल पृथ्वी के गर्भ में संग्रहित नहीं हो पाता और बाढ़ रूप में बाहर आ जाता है, और विकराल रूप ले लेता है।
आज पानी को बचाने के लिए वर्षा के जल का संचयन होना चाहिए, तालाबों का संरक्षण किया जाए। साथ ही पानी बचाने के अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
भूगर्भ जल के संचयन के लिए हमें वनों को काटने से बचाना होगा,जहां पर वन नहीं है, उस भूमि को जल संग्रहण क्षेत्र बनाना होगा।
पानी की बर्बादी रोकने के, रोजमर्रा के उपाय
- दैनिक जीवन में जितने पानी की आवश्यकता हो, केवल उतना ही इस्तेमाल करें।
- कपड़े धोने,जानवरों को नहलाने के बहाने अधिक पानी ना बर्बाद करें।
- मकान और सड़कों के निर्माण में भी बिना वजह ज्यादा पानी बर्बाद होता है।
- सिंचाई आदि के बहाने भी आवश्यकता से अधिक मात्रा में पानी बर्बाद होता है।
- कटी फटी और पुरानी पाइप लाइन के होने से भी पानी की बर्बादी तय है।
ऐसी ही छोटी-छोटी कई ऐसी जग़ह हैं, जहां पर पानी की अधिक मात्रा उपयोग की जाती है । पानी की उपयोगिता को समझते हुए सही जगह पर और अपनी जरूरत के हिसाब से ही इसका प्रयोग करें।
पानी की बर्बादी को हमें रोकना होगा। क्योंकि पानी को किसी भी प्रकार बनाया नहीं जा सकता। यह हमारा प्राकृतिक और अमूल्य संसाधन है। पानी को बचाने और उसको संचयन के लिए हमें जन-जन को जागरूक करना होगा। इसमें केवल सरकार का कार्य नहीं है, यह केवल किसी संस्था का कार्य नहीं है, यह देश के हर नागरिक का कार्य है। हमें स्कूलों में जल संरक्षण और उसकी महत्ता का, इसकी उपयोगिता बता कर बच्चों को तैयार करना है, इसे जन आंदोलन बनाना है। तभी हम इसे भविष्य के लिए उपलब्ध कर सकते हैं।
सरकार द्वारा चलाए गए जल जागरूकता अभियान
विश्व जल दिवस के अवसर पर दिनांक 22 मार्च 2021 को माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा "कैच द रेन" टीम के साथ जल शक्ति अभियान की शुरुआत की गई है, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल के आगमन से पूर्व जल संचयन से संबंधित आधारभूत संरचनाओं का निर्माण / पुनरुद्धार किया जाना है, जिससे वर्षा जल की प्रत्येक बूंद का संचयन किया जा सके।
छात्र छात्राओं सहित आम जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रदेश में दिनांक 16 से 22 जुलाई 2021 के मध्य "भूजल सप्ताह" का आयोजन किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का संदेश... "मैं "भूजल सप्ताह" के सफल आयोजन की कामना करता हूं, और प्रदेशवासियों से अपील करता हूं कि भूजल के संरक्षण एवं संवर्धन में अपना बहुमूल्य योगदान दें।"
लखनऊ उत्तरप्रदेश के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित "वर्षा जल संचयन" सेमिनार हुआ जिसमें प्रमुख आवास सचिव और देश के जाने माने वैज्ञानिक और जामिया मिलिया विश्वविद्यालय के डॉ गौहर महमूद ने लोगों को वर्षा जल संचयन के तरीके बताएं।
उन्होंने कहा कि बारिश का पानी बचाने की योजना बनानी होगी। भविष्य में सभी भवन स्वामियों को वर्षा का जल संचयन करना होगा। अभी केवल 20% मकानों में जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) का आदेश दिया गया है।
जबकि 80% लोगों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, यह 20% लोग 300 वर्ग मीटर से बड़े भूखंड वाले लोग हैं।
उन्होंने कहा कि बाकी 80% लोगों को भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग करना होगा, तभी इस संकट से कुछ हद तक उबरा जा सकता है।
निष्कर्ष
हमारे द्वारा भी बढ़ाया गया प्रयास का एक कदम, हमारे पीछे हजार कदमों को चलने के लिए विवश कर देगा! तो सरकार से अपेक्षा रखने के बजाय, स्वयं को पहल करनी होगी। जिन अमूल्य पानी की बूंदों को हम यूं ही बहा देते हैं ...आने वाले भविष्य में हम अपनी आगे की पीढ़ी को यह बोलेंगे कि हम पानी के पाइप द्वारा अपनी गाड़ियों को धोते थे, अपने घरों को धोते थे, घंटो नहाते थे, जो अतीत की बात हो गई और आज हमारे पास जल बहुत सीमित मात्रा में ही बचा है। यह स्थिति आने से पहले हमें संभल जाना चाहिए। सबसे पहला कार्य पानी की बर्बादी को रोकना। दूसरा जितनी आवश्यकता केवल उतना ही खर्च करना। और तीसरा सरकार को इस कार्य में अपना पूरा सहयोग देना।
जल ही जीवन है... 'भूजल सप्ताह पर विशेष' यह लेख आपको कैसा लगा? मुझे ऐसा लगता है कि देश के हर व्यक्ति के लिए यह विचारणीय मुद्दा है।आप सभी के विचार और कमेंट्स आमंत्रित हैं। हमारी उड़ान वेबसाइट से जुड़ने के लिए आप सब का धन्यवाद क्योंकि.....
"हमारी उड़ान" का लक्ष्य है……
स्वयं में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना।
स्वयं में बदलाव लाकर विश्व परिवर्तन करना।
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